राहुल व अखिलेश: युवराज अब बनेंगे महाराज

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दोनों युवराज अब सरदार बनने को हैं। बीते चुनाव में  जनता को भले ही इन दोनों का साथ न पसंद आया हो लेकिन यह दोनो जल्‍द ही अपनी पार्टी के सरदार की भूमिका में होंगे। अखिलेश वैसे भी पहले से ही सपा के सर्वे सर्वा हैं लेकिन राहुल के लिए यह पहला अवसर होगा जब वह अपनी पार्टी की बागडोर सम्‍भालेंगे। देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस की बागडोर दीवाली के बाद युवा हाथों में होगी। इन युवाओं के दम पर देश की राजनीति आने वाले दिनों में नये तेवर में दिखेगी।

भाजपा भले राहुल को कमतर आंकने का दिखावा करे लेकिन उसके निशाने पर राहुल ही रहते हैं। सोनिया गांधी ने जहां राहुल की ताजपोशी की तैयारियां शुरू कर दी हैं वहीं मुलायम पहले ही अखिलेश को अपना आशीर्वाद दे चुके हैं।

समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव की ओर से आशीर्वाद मिलने के दावे की पृष्ठभूमि में 5 अक्टूबर को आयोजित होने वाले सपा के राष्ट्रीय अधिवेशन में अखिलेश यादव के पार्टी अध्यक्ष चुने जाने की प्रबल संभावना है. सपा के 10वें राष्ट्रीय अधिवेशन से पहले आज पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक होगी, जिसमें अध्यक्ष के कार्यकाल की अवधि बढ़ाकर उसे पांच साल करने सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी.

सपा प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने बताया, बृहस्पतिवार को होने वाली राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पार्टी संविधान में संशोधन कर दल के अध्यक्ष का कार्यकाल तीन साल से बढ़ाकर पांच साल किया जाना है. अखिलेश ने पिछले दिनों पिता मुलायम सिंह यादव को राष्ट्रीय अधिवेशन का न्योता देने के बाद दावा किया था कि उन्हें सपा संरक्षक का आशीर्वाद प्राप्त है. मुलायम ने भी गत 25 सितंबर को संवाददाता सम्मेलन में अखिलेश के विरोधी शिवपाल सिंह यादव के धड़े को झटका देते हुए कहा था कि पिता होने के नाते उनका आशीर्वाद पुत्र के साथ है.

इस पृष्ठभूमि में पूरी संभावना है कि अखिलेश को फिर सपा अध्यक्ष चुन लिया जायेगा. कार्यकाल पांच वर्ष का किये जाने के बाद यह तय हो जायेगा कि सपा वर्ष 2019 का लोकसभा चुनाव और 2022 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव भी पार्टी अखिलेश के नेतृत्व में लड़ेगी. अखिलेश गत एक जनवरी को लखनऊ में आयोजित राष्ट्रीय अधिवेशन में मुलायम की जगह सपा के अध्यक्ष बने थे. उसमें मुलायम को पार्टी का सर्वोच्च रहनुमा बना दिया गया था. साथ ही शिवपाल को सपा के प्रांतीय अध्यक्ष पद से हटा दिया गया था.

सपा का यह अधिवेशन पार्टी में अखिलेश और शिवपाल धड़ों के बीच जारी रस्साकशी के बीच हो रहा है. फिलहाल हालात अखिलेश के पक्ष में नजर आ रहा है. ऐसा माना जा रहा था कि स्वयं को सपा के तमाम मामलों से अलग कर चुके मुलायम 25 सितंबर को लखनऊ में हुए संवाददाता सम्मेलन में अलग पार्टी या मोर्चे के गठन का एलान करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

मुलायम के सहारे समाजवादी सेक्युलर मोर्चे के गठन की उम्मीद लगाये शिवपाल पर अब अपनी राह चुनने का दबाव है. शिवपाल के करीबियों का कहना है कि सपा के कल होने वाले राष्ट्रीय अधिवेशन के बाद वह कोई फैसला ले सकते हैं. पिछली 23 सितंबर को लखनऊ में आयोजित सपा के प्रान्तीय अधिवेशन में उन्होंने शिवपाल यादव गुट को बनावटी समाजवादी की संज्ञा देते हुए समर्थक कार्यकर्ताओं बनावटी समाजवादियों के प्रति आगाह किया था.

अखिलेश ने सपा के आठवें प्रांतीय अधिवेशन को संबोधित करते हुए कहा था, कई बार लोग सवाल उठाते हैं, मैं उनसे यही कहना चाहता हूं कि नेताजी (मुलायम) हमारे पिता तो रहेंगे ही, उनका आशीर्वाद भी बना रहेगा, तो हम समाजवादी आंदोलन को बढ़ायेंगे और नयी ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे. अखिलेश ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के इस्तीफा देने के बाद रिक्त हुई गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव की तैयारियों में जुटने का आह्वान किया था. माना जा रहा है कि इस राष्ट्रीय सम्मेलन में इसकी तैयारियों की रुपरेखा तय हो सकती है.उधर राहुल के सखा सचिन पायलट ऐलान कर चुके हैं कि राहुल दीवाली बाद कांग्रेस की बागडोर अपने हाथ में लेंगे।

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