नोट की चोट: मायावती ने आर्थिक इमरजेंसी कहा तो मुलायम ने एक सप्ताह का समय मांगा

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maya-mulayamलखनऊ। मोदी सरकार द्वारा 500 और 1000 के नोट बंद किए जाने के फैसले का विरोध करते हुए बसपा और सपा ने मोदी सरकार को घेरा है।
मायावती ने कहा कि सरकार का काम अपने वायदों से ध्यान बंटाने वाला नहीं होना चाहिए। प्रधानमंत्री का काम राजनीति से प्रेरित मालूम होता है। विधानसभा चुनाव के ठीक पहले अपने वादे से ध्यान हटाने के लिए बीजेपी की सरकार ने काम किया है। इमरजेंसी जैसा माहौल पैदा किया जा रहा है जैसे कांग्रेस इमरजेंसी लगाई थी वैसे ही बीजेपी अघोषित आर्थिक इमरजेंसी लगा रही है। बसपा सुप्रीमो ने कहा कि अगर नोट बंद करने के फैसले को देखा जाए तो वह इस मानक पर खरा नहीं उतरता कि ये किसके लिए किया गया है। चारों तरफ घबराहट का माहौल है। जब यह फैसला आया तो लोग ऐसे घरों से बाहर निकल आएं जैसे भूकंप आया हो।
उधर समाजवादी पार्टी मुखिया मुलायम सिंह यादव ने नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा 500 और 1000 रुपये के नोटों की वैधता अचानक खत्म किये जाने को एक तरह की अराजकता फैलाने वाला कदम करार देते हुए आज इसे कुछ दिनों के लिये वापस लेने की मांग की। यादव ने कहा कि देश का ज्यादातर काला धन विदेशी मुद्रा या सोने के रूप में पड़ा है और बड़े करेंसी नोटों की वैधता खत्म किये जाने से केवल आम नागरिक ही परेशान हो रहा है। उन्होंने कहाकि मोदी सरकार ने विदेशी बैंकों से काला धन लाने के बजाय देश में एक तरह की अराजकता फैला दी है। भाजपा को केवल चुनाव दिख रहा है, देश नहीं।

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