कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्त्ता आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजे जाने के खिलाफ देशभर के सीबीआई दफ्तरों के बाहर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। कांग्रेस के प्रदर्शन पर केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि विपक्ष के पास कोई अहम मुद्दा नहीं है इसलिए वह गैर जरूरी मुद्दों को उठा रही है। सिंह ने कहा कि सीवीसी की जांच रिपोर्ट आने दीजिए उसके बाद हम कुछ बोलेंगे। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने आज निर्देश दिया कि पूर्व न्यायाधीश ए. के. पटनायक सीबीआई अधिकारियों के बीच लग रहे आरोप-प्रत्यारोप की सीवीसी जांच की निगरानी करेंगे और दो हफ्ते के भीतर रिपोर्ट न्यायालय में सौंपना होगी।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस.के. कौल और न्यायमूर्ति के.एम. जोसेफ की पीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 12 नवंबर की तारीख तय की है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि सीबीआई के अंतरिम निदेशक बनाए गए एम. नागेश्वर राव कोई नीतिगत फैसला नहीं करेंगे। बीते 23 अक्तूबर से अब तक राव की ओर से किए गए निर्णयों पर अमल नहीं होगा और उनके सारे फैसले एक सीलबंद लिफाफे में कोर्ट को सौंपे जाएंगे। कोर्ट ने एनजीओ ‘कॉमन कॉज’ की अर्जी पर भी नोटिस जारी किए। एनजीओ ने सीबीआई अधिकारियों के खिलाफ एसआईटी जांच कराने की मांग की है।

एनजीओ की ओर से दायर अर्जी में सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना को भी प्रतिवादी बनाया गया है। वर्मा और अस्थाना ने एक-दूसरे के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। शुरुआत में उच्चतम न्यायालय ने कहा कि आरोप-प्रत्यारोप पर सीवीसी की जांच इस अदालत की निगरानी में 10 दिनों के भीतर पूरी होनी चाहिए। इस पर सीवीसी ने कहा कि जांच के लिए 10 दिन का वक्त पर्याप्त नहीं है, क्योंकि उसे बहुत सारे दस्तावेज खंगालने होंगे। सीवीसी ने कहा कि कुछ समय तक किसी को निगरानी की अनुमति नहीं दी जाए। पीठ ने सीवीसी को जांच पूरी करने के लिए दो हफ्ते का वक्त दिया।

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