30 हत्यारों पर राष्ट्रपति की दया बरसी

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President Pratibha Patilमासूम बच्चियों से दुराचार और उसके बाद हत्या कर देने वाले नर पिशाचों और हैवानियत की सारी हदें पार कर देने वालों को सर्वोच्च अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी जिसे महामहिम राष्टï्रपति ने माफ कर दिया है। ऐसे 30 हत्यारों को फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलते राष्टरपति का ध्यान पीडि़त परिवारों की ओर नहीं गया जिन्होंने आरोपियों को सजा दिलवाने में दिन रात एक कर दिया। महामहिम को शायद उन मां-बाप के आंसू भी नहीं दिखाई दिए जो जिगर के टुकड़ों को खोने के गम में बहते बहते अब सूख चुके हैं। राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने अपने कार्यकाल के अंतिम दौर में खतरनाक हत्यारों, बलात्कारियों पर दया करने के मामले में एक रेकॉर्ड बना दिया है। उन्होंने कुल 30 हत्यारों की फांसी माफ कर दी है, जो एक रेकॉर्ड है। माफी पाने वालों में 6 साल की बच्ची के साथ दुराचार और हत्या का दोषी सतीश भी शामिल है। बच्ची के पिता उनकी बेटी के हत्यारे को माफी मिलने से सदमे में हैं और उनकी आंखों से आंसू नहीं थम रहे। उन्होंने और उनके परिवार ने राष्ट्रपति के इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। बताते चलें कि सतीश ने 6 साल की बच्ची विशाखा के साथ रेप करके उसकी निर्मम हत्या कर दी थी। विशाखा की क्षत-विक्षत लाश गन्ने के खेत में पड़ी मिली थी। मेरठ में 2001 में हुई इस घटना में सतीश को फांसी की सजा मिली थी। सतीश को हाल ही में राष्टï्रपति को माफी मिली है। समझ में नहीं आता कि जिन 30 अपराधियों की फांसी की सजा उम्रकैद में बदली है, वे 60 लोगों की निर्मम हत्या के अपराध में सुप्रीम कोर्ट से दोषी ठहराए जा चुके थे और उनमें से 22 ने महिलाओं और बच्चों को निशाना बनाया था। एक अंग्रेजी अखबार के खुलासे ने दया याचिका के अस्तित्व को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है। चौंकाने वाली बात तो यह है कि सरकार ने इन घृणित अपराध के मामलों को भी दया के लायक कैसे समझा और मामलों को राष्ट्रपति के विचारार्थ भेजा। केंद्र सरकार के इस कदम का राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने विरोध तक न किया। आंख मूंदकर सब हत्यारों पर दया बरसाती रहीं।
राष्ट्रपति पाटिल की दया के पात्र बने अपराधी मोलाई राम और संतोष यादव ने जेलर की 10 साल की बेटी से जेल परिसर में ही सामूहिक दुराचार किया और फिर उसकी हत्या कर दी थी। तब दोनों एक अन्य मामले में मध्य प्रदेश की एक जेल में बंद थे। अन्य अपराधियों में धर्मेंद्र सिंह और नरेंद्र यादव ने मिलकर 5 लोगों के एक परिवार को मौत के घाट उतार दिया था। जिन लोगों की हत्या हुई थी उनमें पति-पत्नी और उनके 12 साल के दो बेटे और 15 साल की एक लडक़ी शामिल थे। लडक़ी के साथ दुराचार भी किया गया था। इस रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना के पीछे मामला यह था कि नरेंद्र ने इस घटना से कुछ दिन पहले स्कूल से लौट रही 15 साल की लडक़ी से दुराचार करने की कोशिश की थी। वह इसमें कामयाब नहीं हो पाया था। इससे बौखलाए नरेंद्र ने धर्मेंद्र के साथ मिलकर पूरे परिवार को मौत के घाट उतार दिया था। राष्टï्रपति से दया पाने वाले 6 ऐसे लोग हैं जिन्होंने बेहद खूंखार तरीके 4 लोगों को मौत के घाट उतारा था। इनमे से तीन लोगों का सरेआम गला काट डाला और एक 10 साल के बच्चे को जिंदा ही आग में झोंक दिया था। बच्चे को जिंदा जलाने वाली घटना ने लोगों को हिला कर रख दिया था। जिन लोगों पर महामहिम की मेहरबानी बरसी है उनमें पंजाब के प्यारा सिंह और उसके 3 बेटे भी शामिल हैं। इन लोगों ने व्यक्तिगत दुश्मनी के कारण एक शादी के दौरान 17 बेकसूर लोगों की हत्या कर दी थी। 1991 में हुई इस घटना में 4 बच्चे भी मारे गए थे। दया याचिकाओं पर फैसला करने में राष्टï्रपति प्रतिभा पाटिल अन्य राष्टï्रपतियों से आगे निकल गई हैं। पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने 2004 में केवल दो दया याचिकाओं पर विचार किया था। उन्होंने बलात्कार के दोषी धनंजय चटर्जी की दया याचिका खारिज कर दी थी। उन्होंने 2006 में खेराज राम के मृत्युदंड को आजीवन कारावास में बदल दिया था। पूर्व राष्ट्रपति के. आर. नारायणन ने एक भी दया याचिका पर विचार नहीं किया था। इतना ही नहीं मृत्युदंड की कतार में खड़े 17 व्यक् ितयों की दया याचिकाएं राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील के समक्ष अभी भी लम्बित हैं। इनमें से अधिकांश याचिकाएं हत्या या रेप के आरोपों में दोषी पाए गए लोगों की ओर से दायर की गई हैं। देखा जाए तो दया याचिकाएं अब मजाक बन कर रह गई हैं। जब सुप्रीम कोर्ट ने व्यक्ति को दोषी करार दिया है तब उसे माफ करने का क्या औचित्य है। मासूमों से दुराचार और उनकी निर्मम हत्या करने वाले हत्यारों पर दया करने से पहले उन परिवारों और मां बाप के दर्द को जरूर महसूस करना चाहिए। कहीं ऐसा न हो कि लोगों का इंसाफ पर से भरोसा ही उठ जाए।

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