जौनपुर को लखनऊ, प्रतापगढ़ और रायबरेली को जोड़ने वाली तहसील है मछलीनगर। एनएच 31 से गुजरने वाले इस शहर का बहुत ही रोचक इतिहास रहा है। उत्तर प्रदेश की आरक्षित सीटों में से एक यूपी की 74वीं लोकसभा सीट पर हुत ही रोचक चुनाव होता है। जौनपुर से पूर्व में बसी इसी तहसील को लोकसभा का दर्जा दिया गया है। इस लोकसभा सीट पर पांच विधानसभा सीटें आती है। व्यापार के लिहाज से अहम स्थान रखने वाले मछलीशहर में एक बार फिर से सियासत गर्मा गई है।
इस बार यहां महज बारह दिन पुराने भाजपाई नेता बीपी सरोज (भोला प्रसाद) पर पार्टी ने मछलीशहर (सु) क्षेत्र से टिकट देकर बड़ा दांव खेला है। यहां से पार्टी के मौजूदा सांसद रामचरित्र निषाद को दोबारा मौका नहीं मिल सका। कभी जनरल रही इस सीट को 2008 में नए परिसीमन में आरक्षित कर दिया गया है। इस सीट में मछलीशहर, केराकत, पिंडरा, मरियाहू और जाफराबाद सीटें आती है। इसमें से मछलीशहर और केराकत की विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है।

मछलीशहर सीट का रहा समीकरण

मछलीशहर लोकसभा सीट 1962 में आस्तित्व में आई थी। यहां पर पहली बार हुए आम चुनाव में कांग्रेस के गणपत राम ने जीत दर्ज की थी। वह मछलीशहर सीट के सांसद कहलाए। पहले लोकसभा चुनाव में यह सीट अनुसूचित जाति के लिए थी, लेकिन 1967 में यह स्थित नए परिसीमन के बाद सामान्य सीट में आ गई। यहां पर 1962 से 1971 तक की सीट पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की। इसके बाद इस सीट पर पहली बार इमरजेंसी के दौरान 1977 में भारतीय लोकदल से राजकेसर सिंह ने जीत दर्ज करके कांग्रेस का विजय रथ रोका गया था। 1980 के चुनावों में जनता पार्टी (सेक्युलर) ने यहां से जीती। इसके बाद 1984 में कांग्रेस ने वापसी की और श्रीपति मिश्र यहाँ के सांसद निर्वाचित हुए। 1989 और 1991 में शिव शरण शर्मा ने जनता दल को लगातार दो बार जीत दिलाई। इसके बाद इस सीट से भाजपा के कद्दावर के नेता 1996 के चुनाव में राम विलास वेदांती और 1998 में चिन्मयानन्द भारतीय जनता पार्टी के टिकट पाकर चुनाव जीतें और लोकसभा तक पहुंचें। इसके बाद 1999 के चुनाव में सपा के चन्द्र नाथ सिंह ने भाजपा के रामविलास वेदांती को हराकर मछलीशहर में समाजवादी पार्टी का झंडा फहराया। इसके बाद पूर्वांचल के कद्दावर नेता उमाकांत यादव ने बसपा से टिकट पाकर 2004 के लोकसभा चुनाव में चन्द्रनाथ सिंह को हराकर मछलीशहर में बहुजन समाज पार्टी का परचम फहराया। इसके बाद यह सीट 2009 के लोकसभा चुनाव समय इसका परिसीमन करके अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कर दिया गया। इस चुनाव में समाजवादी पार्टी के तूफानी सरोज ने बसपा से 2004 में मिली हार का बदला ले लिया लेकिन साल 2014 में यहां से भारतीय जनता पार्टी के राम चरित्र निषाद सांसद चुने गए। इस बार भाजपा ने उन्हें टिकट नहीं दिया है।

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