मौलाना की अनूठी पहल, ‘जिस घर में शौचालय नहीं वहां निकाह पढने नहीं जाएंगे मौलवी’

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देशभर में चल रहे स्वच्छता अभियान को मुकाम तक पहुंचाने के लिए सभी धर्मों के धर्म गुरुओं ने आगे आकर लोगों को जागरुक करने की पहल की है। स्वच्छता अभियान पर असम सरकार द्वारा कार्यक्रम (ASCOSAN-2017) में जमीयत उलमा-ए- हिन्द के महासचिव तथा पूर्व राज्यसभा सदस्य मौलाना महमूद-ए-मदनी ने कहा कि हरियाणा, हिमाचल प्रदेश तथा पंजाब के मौलवियों और मुफ्तियों ने यह फैसला किया है कि वे उन घरों के लड़कों का निकाह नहीं कराएंगे जिनके घरों में शौचालय नहीं है।

दो दिन चले इस कार्यक्रम में पूरे असम से आए स्वच्छता प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए मदनी ने कहा कि तीनों राज्यों में शौचालय की शर्त को मुसलमानों की शादी में जरूरी कर दिया गया है। जल्द ही इसे पूरे देश में लागू किया जाएगा। जीवा यानी ग्लोबल इंटरफेथ वाश एलायंस के सह संस्थापक स्वामी चिदानंद सरस्वती के नेतृत्व में जुटे देश के तमाम धर्मगुरुओं ने मंच से देश के स्वच्छता मिशन में शामिल होने तथा लोगों को जागरुक करने का ऐलान किया।

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि उन्होंने शौचालय, विद्यालय और फिर देवालय मुहिम शुरू की है। उन्होंने कहा कि साफ-सफाई के अभाव में भारत में हर साल हजारों लोग मौत के मुंह में समा जाते हैं। हम सभी को मिलकर स्वच्छता के बारे में सोचना होगा।

उन्होंने कहा कि हमें मेक इंडिया मुहिम के तहत पूरे देश को खुले में शौच मुक्त बनाना होगा और इसमें सरकार, समाज, संस्थान तथा सभी धर्मों के धर्म गुरुओं को आगे आना होगा। असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने कहा कि उन्होंने इस साल अक्टूबर महीने तक समूचे असम को खुले में शौच मुक्त करने का फैसला किया है और वे इस मुहिम में काफी हद तक सफल भी हुए हैं।

यूनिसेफ के स्वच्छता कार्यक्रम के असम प्रभारी तुषार राणे ने बातचीत के दौरान बताया कि यूनिसेफ असम में काम कर रहे गैर सरकारी संगठनों के माध्यम से गांव-गांव जाकर स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरुक करने में लगा हुआ है।

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