छोटे जख्मों को भी न करें नजरअंदाज

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bandage_24_09_2014हल्की चोट के बाद जख्म से थोड़ा खून निकलना अच्छी बात होती है। छोटा कट लग जाने पर ब्लीडिंग थोड़ी देर में अपने आप रुक भी जाती है, लेकिन उस पर रुई या टिशू के जरिए हल्का दबाव डालकर भी खून निकलने से रोक सकते हैं। रुई जैसे ही खून सोख ले रुई का दूसरा टुकड़ा रख दें, लेकिन ध्यान रखें कि पहले से ही जख्म पर जो खून लगा है उसे हटाएं नहीं, इससे दोबारा ब्लीडिंग शुरू हो सकती है।
कट लग जाने की स्थिति में सबसे पहले उससे साफ पानी से अच्छी तरह से धो दें। यदि जख्म पर कोई कंकड़ या पत्थर के छोटे कण हों तो उसे स्टेरलाइज छोटी चिमटी से निकाल दें। जख्म के आस-पास साबुन और साफ कपड़े से धो दें। कभी भी जख्म में अधिक कैमिकल वाले साबुन, आयोडिन, अल्कोहल या हाइड्रोजन पैराऑक्साइड का इस्तेमाल न करें।
एंटीबायोटिक क्रीम और ऑइंटमेंट से जख्मों को न केवल नमी मिलती है, बल्कि इन्फेक्शन का खतरा भी कम हो जाता है। यदि आप एंटीबायोटिक का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो इसकी हल्की परत जख्म के ऊपर लगाएं। कुछ प्रकार के एंटीबायोटिक की वजह से रैशेज होने का खतरा भी रहता है। यदि आपको भी इस प्रकार की परेशानी हो तो तुरंत ही इसका इस्तेमाल करना बंद कर दें।
यदि आपका जख्म कपड़ों के कारण रगड़ खा रहा हो तो उसे बैंडेज से ढंककर रखें। घाव सही तरीके से ढंका न गया हो, तो उसके फिर से होने या इन्फेक्शन का खतरा रहता है। इस तरह की आशंका लग रही हो तो जख्म को बैक्टीरिया से बचाने के लिए एडहेसिव बैंडेज लगाएं। रोजाना इस बैंडेज को बदलना न भूलें।
बैंडेज के अंदर फफोले जैसे हो रहे हों, जलन हो रही हो तो इसका मतलब है कि बैंडेज में इस्तेमाल होने वाले कुछ एडहेसिव से एलर्जी की शिकायत हो रही है। जिन लोगों की त्वचा सेंसिटिव है उन्हें स्टेरलाइज पट्टी और पेपर टेप का इस्तेमाल करना चाहिए। या फिर एडहेसिव मुक्त ड्रेसिंग करवानी चाहिए।
जिस तरह तुरंत कट लग जाने से जख्म बन जाता है ठीक उसी प्रकार शरीर उस जख्म की हीलिंग तुरंत ही शुरू कर देता है। व्हाइट ब्लड सेल्स इन्फेक्शन पैदा करने वाले बैक्टीरिया पर हमला करते हैं, जिससे जख्म तुरंत ही भरना शुरू हो जाते हैं। यदि जख्म के ठीक होने के बाद उस स्थान पर खुजली हो रही तो उसे तेजी से न खुजलाएं, जख्म के फिर से उभर सकते हैं।

जलने पर क्या करें

यदि दुर्घटनावश त्वचा थोड़ी जल गई है तो सबसे पहले ठंडे पानी से धो दें या फिर ठंडा कपड़ा उस पर रखें ताकि जलन कम महसू हो। इसके बाद जले हुए स्थान को पानी और साबुन से धो दें। यदि फफोले हो गए हैं तो उन्हें फोड़ें नहीं इससे त्वचा सुरक्षित रहती है।

सर्जरी के जख्म की करें केयर

सर्जरी के बाद होने वाले जख्म का ध्यान रखना ठीक चोट लगे जख्म का ध्यान रखने जैसा ही है। जिस स्थान पर चीरा लगाया गया है उसे कुछ दिनों तक बैंडेज द्वारा सुरक्षित रखा जाता है और उसकी रोजाना ड्रेसिंग की जाती है। अपने डॉक्टर के निर्देशों के अनुसार अपने सर्जरी के घाव की देखभाल करें। उस स्थान को हमेशा सूखा रखें, यदि किसी प्रकार की ब्लीडिंग या लालिमा नजर आती है तो तुरंत अपने डॉक्टर से बात करें।

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