चारा घोटाला में लालू यादव को साढ़े तीन साल कैद , लगा 5 लाख का जुर्माना

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फेल हुआ खेल लालू को मिली जेल
चारा घोटाला में लालू यादव को साढ़े तीन साल कैद की सजा, लगा 5 लाख का जुर्माना
भाजपा की राह चलने के बजाए मौत पसंद : लालू

लालू के अलावा दोषी फूल चंद, महेश प्रसाद, बाके जुलियस, सुनील कुमार, सुशील कुमार, सुधीर कुमार और राजाराम को भी 3.5 साल कैद और 5 लाख रुपये की सजा दी गई है। चर्चित चारा घोटाले के एक मामले में रांची की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद को शनिवार को साढ़े तीन साल कारावास की सजा सुनाई है। लालू ने अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की राह में चलने के बजाए मरना पसंद करूंगा। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद के ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया गया, “भाजपा की राह में चलने के बजाए मैं सामाजिक न्याय, सद्भाव और समानता के लिए खुशी से मरना पसंद करूंगा।”

उल्लेखनीय है कि लालू जेल जाने के बाद अपने समर्थकों को ट्विटर के जरिए संदेश देते रहे हैं। जेल जाने के बाद लालू ने ट्वीट किया था, “प्रिय साथियों, कारागार प्रवास के दौरान मेरे ट्विटर हैंडल का संचालन मेरा कार्यालय और परिवार के सदस्य करेंगे। समय-समय पर मुलाकातियों के मार्फत कार्यालय को संदेश पहुंचेगा, जो आपके पास ट्विटर या अन्य विधा से पहुंच जाएगा। संगठित रहिए, सचेत रहिए।”

गौरतलब है कि 23 दिसंबर को जब अदालत ने लालू को दोषी करार दिया था, उस दिन भी लालू ने एक साथ कई ट्वीट कर भाजपा पर निशाना साधा था।शुक्रवार को, अदालत ने सजा के बिंदु पर लालू के वकीलों की बहस सुनी जिसमें उन्होंने उनकी लगभग 70 वर्ष की उम्र होने और बीमार होने की बार-बार दुहाई दी। अदालत ने एक-एक कर बाद में अन्य शेष सात अभियुक्तों की भी सजा के बिन्दु पर उनकी उपस्थिति में बहस सुनी। ये सभी अदालत में हाजिर हुए। पांच आरोपियों बेक जूलियस, गोपीनाथ, ज्योति कुमार, जगदीश शर्मा एवं कृष्ण कुमार प्रसाद की सजा के बिन्दु पर उनके वकीलों ने गुरुवार को बहस पूरी कर ली थी।– सीबीआई के सूत्रों ने बताया कि देवघर कोषागार से फर्जीवाड़ा कर अवैध ढंग से धन निकालने के इस मामले में लालू प्रसाद एवं अन्य के खिलाफ सीबीआई ने आपराधिक साजिश, गबन, फर्जीवाड़ा, साक्ष्य छिपाने, पद के दुरुपयोग आदि से जुड़ी भारतीय दंड संहिता की धाराओं 120बी, 409, 418, 420, 467, 468, 471, 477ए, 201, 511 के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया था।

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