जनता की बचत को जेटली ने फिर लगाई चपत 

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सरकार ने गुरुवार को आठ फीसदी सालाना ब्याज दर वाली बचत बांड स्कीम को बंद करके उसके बदले 7.75 फीसदी ब्याज दर वाली दूसरी बचत बांड स्कीम लाने की घोषणा की। वित्त मंत्रालय की ओर से आए बयान के मुताबिक, नई स्कीम 10 जनवरी से शुरू की जाएगी।

वित्त मंत्रालय ने कहा, “सरकार ने 7.75 फीसदी ब्याज दर वाली बचत (कराधीन) बांड 2018 शुरू करने की घोषणा की है। यह स्कीम 10 जनवरी से शुरू होगी और इसमें देश में निवास करने वाले नागरिक अथवा एचयूएफ यानी अविभाजित हिंदू परिवार कर सकेगा। साथ ही बांड से प्राप्त आय पर कर चुकाना होगा और इसमें निवेश करने की कोई ऊपरी सीमा नहीं होगी।”

एक बांड की कीमत 1000 रुपये होगी और बांड लेखा पंजी में डिमैट फॉर्म में इसे जारी किया जाएगा। बांडों से प्राप्त ब्याज पर बहुत ही कम दर से निवेशक को आयकर देना होगा। सरकार ने सोमवार को यह घोषणा की थी कि बैंकों से सरकारी बचत बांड 2003 की बिक्री मंगलवार से बंद कर दी जाएगी।
हालांकि आर्थिक मामलों के सचिव एस. सी. गर्ग ने मंगलवार को कहा कि आठ फीसदी ब्याज दर वाली बचत बांड स्कीम बंद नहीं की जाएगी बल्कि उसके बदले 7.75 फीसदी ब्याज दर वाली बचत बांड स्कीम लाई जाएगी।

इसी सप्ताह पूर्व वित्त मंत्री पी. चिंदबरम ने इस मसले को लेकर नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा, “आठ फीसदी ब्याज दर वाली सरकारी बचत बांड स्कीम मध्यम वर्ग के लिए 2003 से खासतौर से अवकाश प्राप्त व वरिष्ठ नागरिकों के लिए बचत का सुरक्षित ठिकाना रहा है। सरकार ने उनसे उनका सुरक्षा कवच छीन लिया है।”सरकार की ओर से सावधि जमा व डाकघर मासिक आय स्कीम और लोक भविष्य निधि (पीपीएफ) जैसी छोटी बचत स्कीमों पर अप्रैल 2016 में ब्याज दर घटाकर आठ फीसदी से नीचे करने के बाद वरिष्ठ नागरिकों और पेंशनधारियों जैसे निर्धारित आय चाहने वाले निवेशकों के लिए यह स्कीम पसंद बन गई थी।
पिछले सप्ताह सरकार ने नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (एनएससी), पीपीएफ और किसान विकास पत्र (केवीपी) समेत छोटी बचतों पर चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में ब्याज दर में 0.2 फीसदी कटौती कर दी। पीपीएफ और एनएससी पर एक जनवरी से ब्याज दर 7.6 फीसदी और केवीपी पर 7.3 फीसदी है।
हालांकि वरिष्ठ नागरिकों के लिए पांच साल की अवधि के लिए बचत स्कीम पर ब्याज दर 8.3 फीसदी है।

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