नहीं रहे मुबारक!

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Hosni Mubarak
Hosni Mubarak

मिस्र के अपदस्थ राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक नहीं रहे। उनकी मौत की अभी पुष्टिï नहीं की जा रही है क्योंकि इससे मिस्र में उपद्रव होने की आशंका है। अस्पताल के सूत्रों से पता चला कि उनकी क्लीनिकल डेथ हो चुकी है।मिस्र के अपदस्थ राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक को ब्रेन स्ट्रोक का आघात लगा है।उन्हें यूरा जेल के नजदीक मादी सैन्य अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मीडिया की कुछ खबरों में उनके क्लिनिकल डेथ का दावा किया गया है।
सरकारी टीवी के अनुसार, 84 साल के मुबारक की हालत गंभीर है और उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया है। सरकारी समाचार एजेंसी एमईएनए ने पूर्व में कहा था कि उनका दिल काम नहीं कर रहा है और उसे फिर से सक्रिय करने की कोशिश की जा रही है। डॉक्टरों ने कहा ‘उनके दिल की धडक़न बंद हो गई और दिल को सक्रिय करने की कोशिश नाकाम रही है। मीडिया की कुछ खबरों में उनके क्लिनिकल डेथ का दावा किया गया है।
बहरहाल, नाइले टीवी की खबर में कहा गया है कि उन्हें फिर से जीवित करने के प्रयास जारी हैं और उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया है। इस चैनल पर मुबारक के राष्ट्रपति पद के दौर के फुटेज प्रसारित किये जा रहे हैं। पिछले साल एक लोकप्रिय विद्रोह के बाद मुबारक को राष्ट्रपति पद छोडऩा पड़ा था।
मिस्र के पूर्व राष्ट्रपति होस्नी मुबारक को पिछले साल हुए विरोध प्रदर्शनों में प्रदर्शनकारियों को जान से मारने की घटनाओं से सम्बन्धित होने का दोषी पाया गया है। फरवरी 2011 में मुबारक को सत्ता छोडऩी पड़ी थी। मिस्र के 82 वर्षीय पूर्व राष्ट्रपति होस्नी मुबारक करीब 30 वर्षों तक सत्ता में रहे और इस प्रकार उन्होंने अरब जगत के सबसे ज्यादा जनसंख्या वाले देश का नेतृत्व किया। किसी ने भी शायद ये नहीं सोचा था कि 1981 में अनवर सादात की हत्या के बाद उप-राष्ट्रपति के पद पर मौजूद बहुत ही कम जाने पहचाने नाम होस्नी मुबारक को राष्ट्रपति का पद सौंपा जाएगा और वह इतने वर्षों तक देश की कमान सम्भाले रहेंगे। उनके 30 वर्षों के प्रशासन में आपातकाल सी स्थिति रही क्योंकि कहीं भी पांच से ज्यादा व्यक्तियों के इकट्ठा होने पर पाबंदी थी। अनवर सादात की हत्या इस्लामी चरमपंथियों ने काहिरा में एक सैनिक परेड के दौरान कर दी थी और मुबारक भाग्यशाली रहे थे कि उन्हें गोली नहीं लगी। हालांकि वो उस वक्त उनके बगल में मौजूद थे। उसके बाद से कम से कम उन पर छह बार जानलेवा हमले हो चुके हैं और वो इनमें बच गए। मुहम्मद होस्नी सैयद मुबारक को अनवर सादात की हत्या के आठ दिनों के बाद 14 अक्टूबर 1981 को राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई गई थी।
राष्ट्रपति बनने से पहले कम लोकप्रिय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कम हैसियत रखने वाले इस शक्तिशाली सैनिक ने सादात की हत्या के कारणों का ठीक से इस्तेमाल किया और इसराइल के साथ शांति समझौता कर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़े राजनयिक की हैसियत से अपनी पहचान बनाई थी।
वास्तव में जबसे होस्नी मुबारक ने सत्ता सम्भाली उन्होंने मिस्र पर अर्ध-सैनिक शासक के तौर पर राज किया। अपने पूरे काल में उन्होंने देश को आपातकाल कानून के तहत चलाया और सरकार को गिरफ्तारी और बुनियादी स्वतंत्रता को कुचलने की पूरी आजादी दे रखी थी। एक तरह से मुबारक ने देश को स्थिरता प्रदान की और आर्थिक विकास में हिस्सा लिया और इस कारण उनके देशवासियों ने मिस्र में उनके एकाधिकार को कबूल किया।
जेकिन जब 2011 में मिस्र के शहरों में मुबारक के खिलाफ जन आंदोलन होने लगे इन्हीं आंदोलनों के चलते मुबारक को उप-राष्ट्रपति का नामांकन करना पड़ा।
10 फरवरी 2011 तक आते आते पूरे मिस्र में खबर फैल गई की मुबारक इस्तीफा देने वाले हैं। लेकिन मुबारक ने एक बार फिर लोगों को यह कह कह के चौंका दिया कि वो सितम्बर में होने वाले चुनावों तक सत्ता में बने रहेगें। लेकिन 24 घंटों के भीतर ही मुबारक अपनी पत्नी और बेटों के साथ काहिरा छोड़ कर निकल गए। उनके उत्तराधिकारी और देश के उप राष्ट्रपति उमर सुलेमान ने टीवी पर घोषणा की कि मुबारक ने पद त्याग दिया है। 2011 में अगस्त महीने से ही मुबारक के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे थे।
84 वर्ष के मुबारक के खिलाफ अगस्त 2011 से मुकदमा चलाया जा रहा था। उनके खिलाफ तीन मुख्य आरोप थे। मुबारक पर पहला आरोप ये था कि जनवरी 2011 में शांतिपूर्वक तरीके से प्रदर्शन कर रहे लोगों की हत्या करवाने में उनका हाथ था। इस आरोप में मिस्र में मृत्युदंड या उम्र कैद का प्रावधान है। दूसरा आरोप ये था कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग किया और सह-आरोपी अरबपति हुसैन सलीम से शर्म अल-शेख स्थित सलेम कम्पनी के रिसोर्ट के लिए जमीन के बदले रिश्वत ली। मुबारक पर तीसरा आरोप ये था कि उन्होंने हुसैन सलीम की ही कंपनी को मिस्र से इसराइल को प्राकृतिक गैस का निर्यात करने की अनुमति दी और इसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय कीमतों से कम कीमत पर तय हुई थी। मुबारक को इन तीनों ही आरोपों में दोषी पाया गया है और उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। मिस्र में कुछ हफ्तों में नए राष्ट्रपति शपथ ग्रहण करेंगे। नए राष्ट्रपति से लोगों को सबसे बड़ी उम्मीद ये होगी की वो मिस्र की खुफिया पुलिस का सुधार करें।

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