15 जनवरी को मकर संक्रांति पर प्रयागराज में बहने वाली गंगा नदी में कोई डेढ़ करोड़ श्रद्वालुओं ने डुबकी लगाकरमहाकुम्भ की प्रसिद्वी में चार चांद लगा दिए। कोई एक माह तक चलने वाले इस धार्मिक योग में अगले दो-तीन दिन में भी कई करोड़ श्रद्वालु डुबकी लगाकर पुण्य की प्राप्ति करेंगे। दुनियां में ऐसी कोई संस्कृति नहीं है, जिसमें लोगों की इतनी श्रद्वा और आस्था देखी जाएं। जब हाड़ कंपकंपा देने वाली ठंड हो तब डेढ़ करोड़ लोग पानी में डुबकी लगाएं, यह आश्चर्य की बात है। मकर संक्रांति के योग में प्रयागराज में गंगा नदी में डुबकी लगाने मात्र से कष्टों से मुक्ति मिल जाएगी। ऐसा भरोसा सिर्फ भारतीय संस्कृति में ही देखने को मिलता है। यदि यह भरोसा सच नहीं होता तो सच मानिए कि डेढ़ करोड़ श्रद्वालु प्रयागराज में डुबकी नहीं लगाते। हालांकि हमारी इस सनातन संस्कृति को नष्ट-भ्रष्ट करने के लिए पश्चिम का लगातार हमला हो रहा है। टीवी चैनलों पर अश्लीलता से भरे सीरियल दिखाए जा रहे हैं, लेकिन प्रयागराज के महाकुम्भ ऐसे आयोजन है जो पश्चिम के सांस्कृतिक हमले को विफल कर रहे हैं। पश्चिम की उपभोक्तावादी संस्कृति के प्रतिनिधि भी 15 जनवरी को कैमरे लगाकर हमारे महाकुम्भ को कवर करते देखे गए। विदेशी प्रतिनिधियों का भी मानना रहा कि महाकुम्भ के अजूबे दुनियां में और कहीं देखने को नहीं मिलते हैं। हमारी इस महान संस्कृति की इससे बड़ी बात और क्या होगी कि केन्द्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति को भी महाकुम्भ में महा मंडलेश्वर की उपाधि दी गई। हालांकि अब राजतंत्र नहीं है, लेकिन लोकतंत्र में भी साधु-साध्वी की भूमिका महत्वपूर्ण है। 15 जनवरी को हमारे साधु-संतों ने ही राजा-महाराजाओं की तरह प्रयागराज में शाही स्नान किया। अंदाजा लगाया जा सकता है कि भारतीय संस्कृति में साधु-संतों का कितना मान-सम्मान है। अखाड़ों के साधु-संतों के बाद ही श्रद्वालुओं ने स्नान किया। महाकुम्भ के मौके पर गंगा में डुबकी लगाने के लिए देश भर से श्रद्वालु उपस्थित रहे। यह हमारी सनातन संस्कृति है जो भारत को महान बनाती है। गंगा हिमालय से लेकर बंगाल के समुन्द्र तक बह रही है। इस पवित्र नदी ने कभी नहीं पूछा कि डुबकी लगाने वाला किस धर्म या जाति का है। जिन लोगों ने गंगा को मैला किया, उन्हें भी मां गंगा ने डुबकी लगाने पर पाप मुक्त कर दिया। कल्पना कीजिए कि जब गंगा पूरी तरह साफ होगी तो मां का आशीर्वाद कितना प्रभावी होगा। यह सही है कि अनेक लोगों ने गंगा को बेहद प्रदूषित किया है, जिससे अब गंगा का दम घुटने लगा है। हालांकि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार और योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली यूपी सरकार ने गंगा को स्वच्छ रखने के प्रभावी कदम उठाए हैं। लेकिन इन कदमों में तेजी और सख्ती लाने की जरूरत है। इसमें कोई दोराय नहीं कि महाकुम्भ के आयोजन योगी सरकार ने शानदार किए हैं। श्रद्वालुओं की धार्मिक भावनाओं का ख्याल रखते हुए गंगा नदी के किनारे स्नान के इंतजाम किए गए हैं। ऐसे इंतजाम वो ही कर सकता है जिसका भरोसा सनातन संस्कृति में हो।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.