खाप पंचायत के फरमान को गलत नहीं मानते आजम

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मंत्री जी बाद में अपने बयान से पलट गए

Azam Khan showed his support for Khap Panchayats
Azam Khan showed his support for Khap Panchayats

खाप पंचायत के तालिबानी फरमान के सामने हथियार डाल चुके उत्तर प्रदेश के मंत्री आजम खां शाम को तन गए। उनके रुख में यह बदलाव केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम के बयान के बाद आया है। ‘इस मामले में कानून कुछ नहीं कर सकता’ बोलने वाले आजम खां ने अपना सुर बदलकर कहा है कि कानून का उल्लंघन हुआ तो सरकार कार्रवाई करेगी। आजम के शुरुआती बयान के बाद पी. चिदम्बरम ने कहा कि लोकतंत्र में तुगलकी फरमानों की जगह नहीं है। उन्होंने राज्य सरकार से इस प्रकरण में कार्रवाई की उम्मीद की। कहा कि ऐसे फरमानों का कानून में कोई वजूद नहीं होता। इसके बाद राज्य सरकार ने एकदम से यू-टर्न ले लिया। उत्तर प्रदेश के नगर विकास मंत्री आजम खां ने बागपत जिले की असरा ग्राम पंचायत द्वारा 40 साल से कम उम्र की महिलाओं को हाट में जाने तथा घर से बाहर मोबाइल फोन पर बात करने से रोकने सम्बन्धी निर्णय को ‘निजी फैसला’ बताते हुए कहा है कि किसी निर्णय से कानून का उल्लंघन होने पर सरकार और कानून अपना काम करेगा। आजम ने असरा गांव की पंचायत द्वारा जारी किए गए विवादास्पद निर्णय के बारे में पूछे जाने पर संवाददाताओं को  बताया कि अब उस गांव में क्या राय बनी, किन हालात में बनी, उसकी पृष्ठभूमि क्या है, इस पर गौर करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि एक गांव के लोगों के बीच क्या राय बनी है, यह उनके आपस का घरेलू मामला है। कहने को कोई कुछ भी कह सकता है। अगर उससे कानून का उल्लंघन होता है तो उसे रोकने के लिए सरकार है। आजम ने कहा कि आजाद मुल्क में लोगों को अपनी जिंदगी के बारे में फैसला लेने की स्वतंत्रता है। यह पंचायत की राय हो सकती है। उनकी राय सब लोग मानें, यह जरूरी नहीं है। पंचायत ने यह बात सरकार से नहीं कही है, और न ही सरकार किसी को मोबाइल फोन रखने या नहीं रखने के लिए पाबंद कर सकती है। उन्होंने पंचायत के फैसले को फरमान मानने से इन्कार करते हुए कहा कि बादशाहों की जुबान से निकली बात फरमान कहलाती है। गांव देहात में बैठे लोग कुछ कहेंगे तो उसे फरमान नहीं माना जाएगा। वहीं प्रदेश के पुलिस महानिरीक्षक (कानून-व्यवस्था) बद्री प्रसाद सिंह तक ने यह कहा था कि इसे रोकना उनके वश की बात नहीं है। जागरूकता के माध्यम से ही इस पर अंकुश लगाया जा सकता है। बद्री प्रसाद सिंह का इस मुद्दे पर यह बयान पहली बार नहीं आया है। इसके पहले भी वह अपनी असमर्थता जाहिर कर चुके हैं|

उल्लेखनीय है कि बागपत जिले में रमाला थाने के असरा गांव की ग्राम पंचायत ने गुरुवार को फरमान जारी करके 40 साल से कम उम्र की महिलाओं के बाजार जाने और गांव या गांव से बाहर मोबाइल फोन पर बात करने पर प्रतिबंध लगा दिया है। पंचायत ने प्रेम विवाह पर रोक लगा दी है और धमकी दी है कि इस फरमान का उल्लंघन करने वाले गांव में नहीं रहने पाएंगे। यह भी निर्देश है कि महिलाएं जब भी घर से बाहर निकले उनके सिर ढके होने चाहिए। इस बीच, उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग ने पंचायत के इस फैसले के बारे में जिला प्रशासन से रिपोर्ट देने को कहा है। बहरहाल, गांव के लोगों का कहना है कि पंचायत ने कोई फरमान जारी नहीं किया है, बल्कि यह निर्णय गांव में रहने वाले सभी 36 समुदाय के लोगों का सामूहिक फैसला है|

वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदम्बरम ने कहा है कि खाप पंचायतों के तालिबानी अंदाज में सुनाए गए फरमानों का लोकतांत्रिक समाज में कोई स्थान नहीं है। चिदम्बरम ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि मैं राज्य सरकार से उम्मीद करता हूं कि वह कार्रवाई करे। ऐसे फरमानों का कोई कानूनी वजूद नहीं होता। राज्य प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इस तरह के फरमानों का उल्लंघन करने वालों को किसी तरह का नुकसान न हो। उन्होंने कहा कि मेरे अनुसार इस तरह के फरमानों या फतवा का लोकतांत्रिक समाज में कोई स्थान नहीं है। मैं नहीं समझता कि कोई यह कह सकता है कि कोई कैसे कपड़े पहने या कैसे रहे। यह पूरी तरह अलोकतांत्रिक है। बागपत में असारा की पंचायत ने गुरुवार को यह फरमाना सुनाया था। पंचायत के सदस्यों ने फरमान सुनाने वाले अपने दो सदस्यों को गिरफ्तार करने वाले दो पुलिसकर्मियों की शुक्रवार को पिटाई भी कर दी|

सूबे के बागपत जिले में पंचायत ने अनोखा तुगलकी फरमान सुनाते हुए कहा कि गांव की 40 साल तक की कोई महिलाएं व युवतियां बाजार नहीं जाएंगी। पंचायत का तर्क है कि ऐसा करने से छेडख़ानी की घटनाएं रोकने में मदद मिलेगी।वहीं पंचायत के फरमान पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश सरकार में मंत्री आजम खां ने कहा कि मैं किसी मोबाइल कंपनी का एजेंट नहीं हूं, जो उनकी बिक्री बढ़ाने के लिए कुछ कहूं। गांव के लोगों ने आपस में बैठ कर कोई फैसला लिया है। यह उनका घरेलू मामला है। इसमें मैं क्?या बोलूं।वहीं जिस गांव में यह पंचायत हुई वो केंद्र सरकार में मंत्री अजीत सिंह के लोकसभा क्षेत्र में आता है लेकिन अजीत सिंह ने भी इस पर प्रतिक्रया नहीं दी है|

गौरतलब है कि बागपत के आसरा गांव में लगाई गई इस पंचायत में मुस्लिम बिरादरी के कई लोग शामिल हुए थे और महिलाओं की आजादी को कैद करने का यह अनोखा फरमान सुना दिया गया। पंचायत ने कहा कि गांव के बाहर लगने वाले बाजार में 40 साल उम्र तक की कोई महिला नहीं जाएगी। साथ ही इस उम्र तक की महिलाएं गांव या उससे बाहर मोबाइल का इस्तेमाल नहीं करेंगी|

पंचायत ने साफ किया अगर इस फरमानों का किसी ने उल्लंघन किया तो फिर पंचायत लगाई जाएगी और उसमें उसकी सजा तय की जाएगी।गांव में रहने वाले 43 वर्षीय मोहम्मद रईस ने बताया कि आए दिन युवितयों और महिलाओं के साथ बाजार में हो रही छेडख़ानी की घटनाओं के मद्देनजर पंचायत में यह फैसला लिया गया।हैरानी की बात यह रही समाज के इन कथित रहनुमाओं ने छेडख़ानी करने वालों को सजा देने को लेकर पंचायत में कोई फरमान नहीं जारी किया|

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