राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अफजल की जल्द फांसी से किया इंकार

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pranavनव निर्वाचित राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अफजल गुरु की दया याचिका पर टिप्पणी करने से इन्कार कर दिया है। उन्होंने कहा कि वह पदभार ग्रहण करने के बाद मामले का अध्ययन करने के पश्चात ही इस संबंध में कुछ कह बोलेंगे। समाचार चैनलों को दिए साक्षात्कार में प्रणब ने कहा कि ऐसे फैसले सरकार की सलाह पर ही लिए जाते हैं।

प्रणब ने कहा कि दया याचिका का निपटारा मंत्रियों के समूह की सिफारिश पर किया जाता है। इसलिए इस तरह के मामलों में कोई भी यह नहीं सुनेगा कि वह किन परिस्थितियों में फैसला कर रहे हैं। 13 दिसंबर 2001 को संसद पर हुए हमले में 12 लोगों की मौत हो गई थी। इस मामले में दोषी ठहराए गए अफजल की दया याचिका कई सालों से लंबित है।

वहीं, दूसरी तरफ शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने कहा कि अफजल गुरु की दया याचिका खारिज करते हुए प्रणब मुखर्जी को अपनी नई पारी का आगाज करना चाहिए। राष्ट्रपति चुनाव में संप्रग का साथ देने वाले ठाकरे ने प्रणब मुखर्जी को निर्वाचित होने पर बधाई भी दी है।

ठाकरे ने पार्टी के मुखपत्र सामना में लिखा है कि प्रणब मुखर्जी से हमारी बहुत सारी अपेक्षाएं हैं। लेकिन सबसे पहले वह देश की संप्रभुता पर हमला करने वाले अफजल की दया याचिका को खारिज दें ताकि उसे फासी पर लटकाया जाए। प्रणब को यह धार्मिक कर्तव्य निभाना होगा। स्वतंत्रता संग्राम में लाल, बाल और पाल [लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक और बिपिन चंद्र पाल] के योगदान की ओर ध्यान दिलाते हुए उन्होंने कहा कि आज भी इस त्रिमूर्ति की जादू बरकरार है। प्रधानमंत्री लाल के पंजाब से आते हैं लेकिन सोनिया गांधी की छत्रछाया में देश को मजबूती नहीं मिल पा रही है। जबकि पाल की जगह प्रणब मुखर्जी ने ली है। तिलक का स्थान कोई नहीं ले सकता। सामना के ही संपादकीय में ठाकरे ने लिखा है कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चह्वाण की कुर्सी खतरे में है।

शरद पवार के पुराने मित्र ठाकरे ने कहा है कि अगर राकांपा संप्रग से हटती है तो केंद्र की सरकार पर तो कोई आंच नहीं आएगी लेकिन चह्वाण की विदाई हो सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार से बाहर होने संबंधी पवार के बयान ने कांग्रेस की नींद खराब कर दी है|

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