नहीं रहे बाबू मोशाय गुजरे पल बहुत याद आए

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Rajesh Khannaराजेश खन्ना बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार जिन्होंने अपनी जिंदगी में वह मुकाम पाया जो किसी भी स्टार का सपना हुआ करता है। अच्छी तरह याद है कि जब राजेश खन्ना 1991 में चुनाव प्रचार के दौरान लखनऊ आए थे तो डालीगंज में बना मंच टूट गया लेकिन राजेश खन्ना घबराए नहीं और प्रशंसकों से दिल खोलकर मिले।
किसी जमाने में करोड़ों जवां दिलों की धड़कन रहे हिन्दी फिल्मों के पहले सुपर स्टार राजेश खन्ना ने अभिनय के अलावा फिल्म निर्माता और नेता के रूप में भी लोकप्रियता हासिल की।
खून से पत्र लिखती थीं लड़कियां

 अभिनेता के रूप में उनके लोकप्रियता का यह आलम था कि बड़े-बड़े स्टार उनकी चमक के सामने फीके पड़ गए थे। वह बॉलीवुड के संभवत: पहले ऐसे अभिनेता थे जिन्हें देखने के लिए लोगों की कतारें लग जाती थीं और लड़कियां अपने खून से उन्हें पत्र लिखा करती थीं। राजेश खन्ना ने कुल 163 फिल्मों में काम किया, जिनमें 106 फिल्मों में वह नायक रहे और 22 फिल्मों में उन्होंने सहनायक की भूमिका अदा की। इसके अलावा उन्होंने

17 लघु फिल्मों में भी काम किया। तीन फिल्म फेयर पुरस्कार से नवाजे गए

काका के नाम से मशहूर राजेश खन्ना ने सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्म फेयर पुरस्कार तीन बार हासिल किया और चौदह बार वह इस पुरस्कार के नामांकित हुए। उन्होंने सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए बीएफजेए पुरस्कार चार बार प्राप्त किया और 25 बार वह इसके लिए नामांकित किए गए। उन्हें 2005 में लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार दिया गया।

राजेश खन्ना ने अपना फिल्मी सफर ‘आखिरी खत’ फिल्म से शुरू किया और राज, बहारों के सपने, इत्तेफाक और आराधना जैसी फिल्मों से वह उस मुकाम तक पहुंचे, जहां शायद ही कोई अभिनेता पहुंच पाए। एक खास अदा के साथ पलकें झपकाते हुए मुस्कराकर अपने प्रेम का इजहार करते रोमांटिक हीरो की उनकी छवि के दीवाने आज भी बहुत हैं। कुछ दूसरे अभिनेताओं ने उनकी इस अदा की कापी करने की कोशिश की लेकिन वह इसमें कामयाब नहीं हो पाए। राजेश खन्ना का मूल नाम था जतिन खन्ना

राजेश खन्ना ‘मूल नाम जतिन खन्ना’ का जन्म 27 दिसम्बर 1942 को पंजाब में हुआ था। उन्होंने अपने दोस्त रवि कपूर ‘फिल्म अभिनेता जितेन्द्र’ के साथ गिरगाम के सेंट सेबेस्टियंस गोअन हाई स्कूल में शिक्षा हासिल की। इसी दौरान राजेश खन्ना की रंगमंच में दिलचस्पी बढ़ने लगी और उन्होंने स्कूल में कई नाटकों में भाग लिया। बाद में दोनों मित्र किशिनचंद चेल्लाराम कॉलेज में अध्ययन करने लगे।
दिलचस्प बात है कि जब जितेन्द्र अपने पहले फिल्म ऑडिशन के लिए गए तो राजेश खन्ना ने ही उन्हें अभिनय के गुर बताए थे। जब राजेश खन्ना ने फिल्मों में काम करने का फैसला किया तो उनके एक चाचा ने उनका नाम बदलकर ‘राजेश’ रख दिया। राजेश खन्ना के सभी मित्र और उनकी पत्नी डिंपल कपाडिया उन्हें ‘काका’ कहकर संबोधित करती थीं।
फैशन डिजाइनर अंजू महेंद्रू से भी हुआ था इश्क
अपनी युवावस्था में राजेश खन्ना का फैशन डिज़ाइनर और अभिनेत्री अंजू महेन्द्रू से लगभग सात साल तक इश्क चला लेकिन बाद में दोनों अलग हो गए। 1973 में राजेश खन्ना ने डिंपल कपाडिया से विवाह कर लिया। उस समय डिम्पल की पहली फिल्म ‘बॉबी’ प्रदर्शित नहीं हुई थी। यह फिल्म उनके विवाह के छह माह बाद प्रदर्शित हुई। दोनों की दो पुत्रियां रिंकी खन्ना और ट्विंकल खन्ना हुईं। बाद में राजेश खन्ना के फिल्मों में व्यस्त हो जाने और डिंपल कपाडिया के फिल्मों में अपना करियर फिर से शुरु करने की इच्छा जताने पर दोनों ने अपने रास्ते अलग कर लिए। हालांकि उन्होंने तलाक नहीं लिया।

बाद में राजेश खन्ना का नाम टीना मुनीम से भी जुड़ा लेकिन उच्च अध्ययन के लिए विदेश जाने के वास्ते फिल्म इंडस्ट्री छोड़ने पर उनका टीना मुनीम से भी अलगाव हो गया।

प्रतिभा प्रतियोगिता से निकले थे राजेश खन्ना राजेश खन्ना का फिल्मों में प्रवेश 1965 में यूनाइटेड प्रोड्यूसर्स और फिल्मफेयर द्वारा आयोजित अखिल भारतीय प्रतिभा प्रतियोगिता से हुआ था। जिसमें दस हजार प्रतिभागियों ने भाग लिया था। वह इसके फाइनल में पहुंचने वाले आठ प्रतिभागियों में शामिल थे। उन्होंने फिल्मों में अपने अभिनय की शुरुआत ‘आखिरी खत’ फिल्म से की। 1966 में बनी इस फिल्म का निर्देशन देवानन्द के बड़े भाई चेतन आनन्द ने किया था। उसके बाद उन्होंने रवीन्द्र दवे की ‘राज’ फिल्म में काम किया। प्रतियोगिता में जीतने पर उन्हें इन फिल्मों में काम करने का मौका दिया गया था। उन्हें साइन करने वाले पहले निर्माता निर्देशक जी पी सिप्पी और नासिर हुसैन थे।
आखिरी खत 1967 में 40वें ऑस्कर अकादमी पुरस्कारों के लिए विदेशी भाषा की सर्वश्रेष्ठ फिल्म के वास्ते भारतीय प्रविष्टि थी। राजेश खन्ना ने किसी साक्षात्कार में कहा था कि हालांकि आखिरी खत मेरी पहली फिल्म थी लेकिन नायक के रूप में मुझे पहला ब्रेक ‘राज’ फिल्म से मिला। इस फिल्म में उनकी नायिका बबीता थीं, जो उस समय काफी लोकप्रिय थीं।

उन्होंने बताया था कि पहली बार कैमरे के सामने वह असहज महसूस कर रहे थे जिसकी वजह से उनके संवाद बोलने में कुछ गड़बड़ी हो रही थी और मूवमेंट सही नहीं हो रहा था लेकिन निर्देशक द्वारा सीन समझाए जाने और सही मूवमेंट का तरीका बताए जाने के बाद वह सहज हो गए थे।
जब लोगों ने उन्हें सुपरस्टार कहना शुरू किया यूनाइटेड प्रोडूसर्स से अनुबंध होने की वजह से उन्होंने ‘औरत’, ‘डोली’ और ‘इत्तेफाक’ जैसी कुछ फिल्मों में काम किया। बहारों के सपने, औरत, डोली, आराधना और इत्तेफाक फिल्म से वह लाइमलाइट में आए। वहीदा रहमान की सिफारिश पर उन्हें खामोशी फिल्म मिली। आराधना फिल्म से तो वह कामयाबी की बुलंदी पर जा पहुंचे और समालोचक उन्हें बॉलीवुड का पहला सुपर स्टार कहने लगे। इस फिल्म में उन्होंने नायिका शर्मिला टैगोर के पति और पुत्र दोनों की भूमिकाएं निभाई थीं। आराधना ने न सिर्फ राजेश खन्ना को सुपर स्टार का दर्जा दिलाया बल्कि गायक किशोर कुमार के करियर को भी नई ऊंचाई दी। इसके बाद तो दोनों की जोड़ी ने अनेक फिल्मों में अपने फन का वह जलवा दिखाया कि दर्शकों को एक के बिना दूसरे की कल्पना ही अधूरी लगने लगी।

इसके बाद राजेश खन्ना की फिल्म आई ‘हाथी मेरे साथी’ यह फिल्म सुपरहिट रही और उस समय तक सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी। पटकथा लेखक सलीम खान और जावेद खान की जोड़ी को पहली बार मौका देने का श्रेय राजेश खन्ना को ही है। इस जोड़ी ने ही ‘हाथी मेरे साथी’ की पटकथा लिखी।

मुमताज का साथ रहा था काफी लंबा

राजेश खन्ना और मुमताज का फिल्मों में लंबा साथ रहा। दोनों ने एक साथ आठ फिल्मों में काम किया और सभी कामयाब रहीं। पर्दे पर इस जोड़ी की कैमिस्ट्री गजब की रही। राजेश खन्ना के शादी कर लेने के बाद मुमताज ने 1974 में मयूर मधवानी से विवाह करने का फैसला किया। उस समय मुमताज राजेश खन्ना के साथ ‘आप की कसम’, ‘रोटी’ और ‘प्रेम कहानी’ में काम कर रही थीं लेकिन उन्होंने फैसला किया कि वह इन फिल्मों को पूरी करने के बाद ही फिल्म इंडस्ट्री को अलविदा कहेंगी।

जब वह फिल्मी दुनिया से बाहर चली गई तो राजेश खन्ना ने रिक्तता का अनुभव किया। मुमताज ने किसी साक्षात्कार में कहा था कि मैं उनके असंख्य प्रशंसकों को लेकर उनकी खिंचाई करती थी और उन्हें छेड़ती रहती थी। मद्रास में जब वह आधी रात को एक होटल में दाखिल हुए तो उस समय 600 लड़कियां खड़ी होकर उनका बेसब्री से इंतजार कर रही थीं। इस वजह से मुझे भी कुछ महत्व मिल जाता था और लोग मेरे आटोग्राफ लेने लगते थे।

 

जब युवतियां चूमती थीं उनकी गाड़ी

शीर्ष पर रहने के दौरान राजेश खन्ना के अभिनय और अदाओं का जादू उनके प्रशंसकों के सिर इस कदर चढ़कर बोलता था कि युवतियां उनकी कार को चूम लेती थीं और जगह-जगह उनकी लिपस्टिक लग जाती थी। लोग उनकी एक झलक पाने के लिए सड़क पर लाइन लगाकर खड़े हो जाते थे और उनका नाम ले लेकर पुकारा करते थे। कामयाबी के उन दिनों में उनके बंगले के बाहर निर्माताओं के कारों की कतार लगी रहती थी और उन्मादग्रस्त प्रशंसकों की भीड़ जमा रहती थी।

हास्य कलाकार महमूद ने अपनी फिल्म ‘बांबे टू गोवा’ में उनकी पैरोडी की थी। इस फिल्म में बस के ड्राइवर का नाम राजेश और कंडक्टर का नाम खन्ना रखा गया था। आज भी कलाकार उनके अभिनय के विशिष्ट अंदाज और संवाद अदायगी की नकल करते हैं। जब हावडा पुल पर नहीं करने दी शूटिंग 

‘अमर प्रेम’ की शूटिंग के दौरान का एक दिलचस्प वाकया है। इस फिल्म में एक दृश्य फिल्माया जाना था जिसमें राजेश खन्ना और शर्मिला टैगोर नाव में बैठे हुए हैं और उनकी नाव हावडा पुल के नीचे से गुजर रही है। लेकिन अधिकारियों ने इस दृश्य के फिल्मांकन की इजाजत नहीं दी क्योंकि उन्हें अंदेशा था कि यदि लोगों को पता लगा कि राजेश खन्ना वहां हैं तो पुल के लिए समस्या खड़ी हो सकती है और ऐसा भी हो सकता है कि अपने पसंदीदा अभिनेता की एक झलक पाने के लिए बेताब भीड़ के भार से पुल ही ढह जाए।

फोटो के साथ शादी कर लेती थीं लड़कियां

एक फिल्म समालोचक ने लिखा था कि दीवानी युवतियां राजेश खन्ना की फोटो के साथ विवाह रचा लेती थीं और अपनी उंगलियों को काटकर खून से मांग में सिंदूर भरा करती थीं। राजेश खन्ना उनके लिए भगवान की तरह थे। इससे पहले हिन्दी फिल्मों के इतिहास में किसी अभिनेता का ऐसा क्रेज नहीं देखा गया था।
सत्तर के दशक में शर्मिला टैगोर, मुमताज, आशा पारेख, जीनत अमान और हेमा मालिनी के साथ उनकी जोड़ी दर्शकों में काफी लोकप्रिय थी। ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (बीबीसी) ने 1974 में एक फिल्म बनाई थी, जिसका शीर्षक था, बाम्बे सुपरस्टार। बाम्बे यूनिवर्सिटी द्वारा निर्धारित एक पाठपुस्तक में एक निबंध रखा गया था, जिसका शीर्षक था, राजेश खन्ना का करिश्मा। महिलाओं की कतारें होती थीं काका के दीदार के लिए

शर्मिला टैगोर ने एक साक्षात्कार में कहा था कि काका को देखने के लिए महिलाओं की भीड़ लग जाती थी। वे उनकी एक झलक देखने के लिए स्डूडियों के बाहर घंटों कतारों में खड़ी रहती थीं। वे उनके फोटोग्राफ से विवाह रचाती थीं। हर्षातिरेक में उनके कपडे खींचने लगती थीं। मुम्बई की लड़कियों की तुलना में दिल्ली की लड़कियां उनके लिए ज्यादा दीवानी थीं। लोगों के बीच जाते समय उन्हें पुलिस की सुरक्षा में बाहर निकलना पड़ता था। मैंने इससे पहले ऐसी बात कभी नहीं देखी थी।

हिन्दी फिल्म जगत के पहले सुपर स्टार राजेश खन्ना के निधन पर बॉलीवुड हस्तियों ने भावभीनी श्रृद्धांजलि देते हुए अपने चहेते काका को याद किया और कहा कि उनका जादू हमेशा बरकरार रहेगा और उनका जैसा न कोई था और न ही कोई होगा।

राजेश खन्ना को लोग प्यार से ‘काका’ कह कर पुकारते थे. ये राजेश खन्ना ही थे जिन्होंने 1960 और 1970 के दशक में परदे पर रोमांस को एक नई पहचान दी.

राजेश खन्ना को हिंदी सिनेमा में पहले सुपरस्टार का रुतबा हासिल हुआ.

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दिलचस्प बात ये है कि राजेश खन्ना एक टेलेंट हंट प्रतियोगिता के विजेता बन कर फिल्मों में आए थे और उन्होंने उस जमाने में हिंदी सिनेमा में अपनी जगह बनाई जब दिलीप कुमार, देवानंद और राजकपूर की त्रिमूर्ति पूरी तरह छाई हुई थी.

यूनाइटेड प्रोड्यूसर्स और फिल्मफेयर ने 1965 में एक टेलेंट हंट प्रतियोगिता कराई जिसमें लगभग दस हजार लोगों ने हिस्सा लिया और आखिर में इसके विजेता बने राजेश खन्ना.

इस तरह अमृतसर में पैदा होने वाले जतिन खन्ना फिल्म नगरी पहुंचे और राजेश खन्ना बन गए.

शानदार कामयाबी

राजेश खन्ना की शुरुआत ‘आखिरी खत’, ‘बहारों के सपने’ और ‘राज’ जैसी फिल्मों से हुई, लेकिन 1969 में आई ‘अराधना’ ने उन्हें रातों रात स्टार बना दिया. इसके बाद ‘खामोशी’ में उनके अभिनय की खूब तारीफ हुई और फिल्म समीक्षक उन्हें सुपरस्टार कहने लगे.

राजेश खन्ना ने 1969 से 1972 के बीच लगातार 15 हिंट फिल्में दीं. कुछ फिल्मी पंडित कहते हैं कि ये अपने आप में एक रिकॉर्ड है जो अब तक नहीं टूटा है.

‘कटी पतंग’, ‘अमर प्रेम’, ‘अपना देश’, ‘आपकी कसम’, ‘नकम हराम’, ‘फिर वही रात’, ‘अगर तुम न होते’, ‘आवाज’, ‘प्रेम नगर’, ‘अवतार’, ‘आनंद’ और ‘हम दोनों’ जैसी फिल्में आज भी सिने प्रेमियों को अपनी तरफ खींचती हैं.

मुमताज के साथ राजेश खन्ना की जोड़ी बेहद हिट रही. दोनों आठ फिल्मों में एक साथ आए और ये सभी बड़ी गोल्डन जुबली हिट रहीं. लेकिन शर्मिला टैगोर, आशा पारिख और जीनत अमान जैसी अभिनेत्रियों के साथ भी उनकी जोड़ी को खासा पसंद किया गया.

फिल्मों से राजनीति तक

लेकिन 1976 के बाद से उनकी फिल्में बॉक्स पर कमजोर पड़ने लगीं. दरअसल ये वो दौर था जब हिंदी फिल्मों के दूसरे और सबसे बड़े सुपरस्टार अमिताभ बच्चन हिंदी सिनेमा पर छाने लगे थे.
राजेश खन्ना ने राजनीति में भी हाथ आजमाया लेकिन जल्द ही फिल्में उन्हें अपनी तरफ खींच ले गईं.
दरअसल सामाजिक और राजनीतिक हलचल वाले उस दौर में सिने प्रेमियों के बीच अमिताभ बच्चन की एंग्री यंगमैन की छवि रोमांटिक फिल्मों पर भारी पड़ रही थी. लेकिन इससे पहले का लगभग एक दशक राजेश खन्ना और उनकी फिल्मों के नाम रहा.

1980 के दशक में भी राजेश खन्ना फिल्मों में दिखते रहे और टीना मुनीम के साथ उन्होंने’फिफ्टी-फिफ्टी’, ‘सौतन’, ‘आखिर क्यों’, ‘बेवफाई’ और ‘अधिकार’ जैसी कई हिट फिल्में दीं. इस दौर में उन्होंने बहुत सी मल्टीस्टारर फिल्मों भी काम किया. उन्होंने कई फिल्मों का निर्माण भी किया.

लेकिन 1990 का दशक आते आते राजेश खन्ना ने फिल्मों को अलविदा कह दिया और राजनीति में आ गए. वो 1991 में कांग्रेस के टिकट पर नई दिल्ली लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए. हालांकि राजीव गांधी के कहने पर वो कांग्रेस के लिए प्रचार काफी पहले से करते रहे थे.

वर्ष 2000 के बाद राजेश खन्ना फिल्मों से गायब से हो गए. इस दौरान इक्का दुक्का फिल्में ही कीं. इसके अलावा कुछ टीवी सीरियलों में भी वो दिखे.

परिवार

‘काका’ के नाम से मशहूर राजेश खन्ना ने मार्च 1973 में डिंपल कपाड़िया से शादी की यानी उनकी पहली फिल्म बॉबी रिलीज होने से छह महीने पहले. हालांकि बाद में दोनों अलग हो गए लेकिन कभी तलाक नहीं लिया. राजेश खन्ना के बीमारी के दौरान डिंपल ने उनका काफी ख्याल रखा.

राजेश खन्ना और डिंपल की दोनों बेटियों ट्विंकल खन्ना और रिंकी खन्ना भी बॉलीवुड में अभिनय कर चुकी हैं.ट्विंकल खन्ना के पति और मशहूर अभिनेता अक्षय कुमार अपने ससुर राजेश खन्ना के काफी करीबी रहे हैं.

राजेश खन्ना ने अपने करियर में अदाकारी के अलग अलग रंग दिखाए लेकिन 1969 से 1976 बीच निर्विवाद रूप से वो हिंदी सिनेमा के मेगास्टार रहे हैं. उनके चलने, बोलने और पहनावे समेत हर अदा पर लोग कुरबान हुआ करते थे.

बताते हैं कि उनके चाहने वाले उन्हें अपने खून से लिखी चिट्ठियां भेजा करते थे. हाल ही में राजेश खन्ना पंखों के एक विज्ञापन में दिखाई दिए. विज्ञापन में बेहद कमजोर दिख रहे राजेश खन्ना ये कहते दिखाई दिए कि उनके ‘फैंस’ हमेशा उनके साथ रहेंगे.

रोमांटिक फिल्मों के बेताज बादशाह खन्ना का आज उनके बांद्रा स्थित आवास आशीर्वाद में निधन हो गया। काका के साथ फिल्म अवतार समेत 10 फिल्मों में काम कर चुकीं अभिनेत्री शबाना आजमी ने माइक्रो ब्लागिंग वेबसाइट टि्वटर पर लिखा कि वह सुपरस्टार थे और उनके जैसा कोई नहीं। मैंने उनके साथ 10 फिल्में की और अंतिम बार अप्सरा पुरस्कार के दौरान मिली थी, लेकिन उनकी मुस्कराहट अब भी मन मोह लेने वाली थी। ईश्वर आपकी आत्मा को शांति दे।उन्होंने कहा कि मैंने देखा था कि बूढ़ी महिलायें उनके साथ लिपट-लिपट कर रोती थीं। युवतियां उनकी उपस्थिति में बिल्कुल पागल सी हो जाती थीं। राजेश खन्ना मदहोश कर देने वाले थे बॉलीवुड के वर्तमान किंग कहे जाने वाले शाहरुख खान ने कहा कि किसी ध्येय के साथ जीवन जीना और उसे अंत तक पहुंचाना, खुलकर जिंदगी जीना और उसके प्रति कोई खेद न होना, मुस्कराना और हमें भी मुस्कराने के लिये मजबूर करना। सर आपने हमारे दौर को यह सब सिखाया।

शाहरुख खान ने लिखा कि मम्मी और मैं एक के बाद एक राजेश खन्ना जी की फिल्में देखते थे। जब भी जीवन हमें दुष्कर लगने लगता था तब आपने हमें सिखाया कि कैसे प्यार इन सबको बदल सकता है। हम आपको हमेशा याद करेंगे।

अभिनेत्री माधुरी दीक्षित ने कहा कि हिंदी सिनेमा के एक और दिग्गज राजेश खन्ना ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। राजेश खन्ना जी के शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना। हम आपको हमेशा याद करेंगे।

अपने फिल्मी करियर में राजेश खन्ना के साथ काम करने का एक मौका गंवाने वाली जानीमानी अभिनेत्री सायरा बानो ने उन्हें बहुत ही शर्मीले अभिनेता के तौर पर याद किया। उन्होंने कहा कि मुझे उनके साथ छोटी बहू में काम करना था लेकिन मैं बीमार होने के चलते उनके साथ काम नहीं कर पाई। मैंने उनके साथ दो दिन तक शूटिंग की थी और देखा कि वह बहुत आकर्षक, विनम्र और शर्मीले इंसान थे। उनकी आत्मा को शांति मिले|

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