गणित जिसका नाम सुनते ही बड़ों बड़ों को बुखार आ जाता है। बचपन में गणित से भागा तो नहीं लेकिन डर जरूर लगता था अगर कहीं चूके तो गये काम से। रेखागणित जहां बहुत उलझाती थी तो बीजगणित के नखरे भी कम नहीं थे। अंकगणित तो खैर डराने के लिए मैदान में डटी रहती थी। बड़े होने पर कैलकुलस स्‍टेटिक्‍स कोआर्डीनेट भी बहुत छकाती थी हां लेकिन एक बार गणित से गणित बैठ गई तो समझो काम बन गया। हरियाणा की डा. ऋतु बाला जो मैथ की जादूगर हैं ने गणित का रूप रंग ही बदल दिया है। इनसे बात करिये तो समझ में आयेगा कि हाइट एंड डिस्‍टेंस या फिर पैराबोला का जीवन में कितना व्‍यावहारिक महत्‍व है। डॉ ऋतु बाला ने मैथ को सरल बनाती किताबें भी लिखी हैं। मैथ के साथ ही मनोविज्ञान में भी मास्‍टरी है इनकी। शिक्षाशास्‍त्र में पीएचडी के साथ ही इनकी 7 किताबें बाजार में आ चुकी हैं। अब तक 40 शोध पत्र प्रस्‍तुत कर चुकी डा. ऋतु बाला ने बच्‍चों में गणित का हौव्‍वा खत्‍म कर दिया है। गणित को आसान बनाने के लिए मैथ में थ्री टायर टेस्‍ट का अभिनव प्रयोग किया है। आपने बलैकबोर्ड पर गणित को आसान बनाते मास्‍टर जरूर देखें होंगे लेकिन कव्‍वाली नाटक और नृत्‍य से सवालों के हल और गणित को हलवा बनाते नहीं देखा होगा। बीते दिनों ‘राष्ट्रीय गणित दिवस’ पर डा. ऋतु बाला के निर्देशन में विद्यार्थियों ने गणित रंगोली, गणित मेहंदी और गणित पेपर प्रेजेंटेशन आदि प्रतियोगिताओं में अपनी रंगारंग प्रस्तुतिया दी । लघु नाटिका ‘गणित: रट्टा य़ा समझ’, से बताया गया गणित रटने नहीं समझने की चीज है। गणित के कठिन पड़ावों को पार करने गुर कव्‍वाली में बताये गये तो भारतीय गणित पर पहली बार हुए स्‍वैग डांस ने सुरों की लय ताल के बीच ज्यामिति, रेखा, अंकगणित, रेखा चित्रों को पलक झपकते ही समझा दिया। इतना ही नहीं गणित को लेकर दिन पर दिन नये प्रयोग कर रहीं डा. ऋतु बाला का सपना मैथ फेयर लगाने का है। मैथ फेयर में वह फिल्‍म व खिलौनों के माध्‍यम से गणित का सहज और सरल रूप बच्‍चों के सामने लाना चाहती हैं। हां ए क बात और कि गणित जैसे जटिल विषयों में उलझीं डॉ ऋतु बाला कविताएं भी लिखती हैं वो भी दिल को छू लेने वाली। समय मिले तो उनकी वाल पर जरूर दस्‍तक दीजिये
https://www.facebook.com/ritu.bala.14 में मैथ की जादूगर के अलग अंदाज से रुबरू होंगे।

 

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