दर्जा सांसद आदर्श ग्राम का, सुविधाएं ढेला भर भी नहीं

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हरिओम चौधरी
संतकबीरनगर। भारत के प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेन्द्र मोदी द्घारा गांव की दशा दिशा सुधारने के लिए अपने सांसदों से एक-एक गांव गोद लेकर उनके समुचित विकास की परिकल्पना की थी जिससे पिछड़े हुए गांव को विकास की बुलंदी पर पहुंचाया जा सके।इसी क्रम में संतकबीरनगर सांसद द्वारा मेहदावल तहसील के ग्राम पंचायत सांडे खुर्द को गोद लिया गया जिससे ग्रामीणों को यह लगने लगा कि अब हम लोगों के दिन भी बहुरेंगे हमारे बच्चे भी अच्छी शिक्षा प्राप्त करेंगे तथा हम लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी साथ ही सड़क, बिजली, पानी की सुविधाओं की आशा ग्रामीणों द्वारा की गई लेकिन उनका निकला क्योंकि यहां के ग्रामीणों का कहना है कि इससे अच्छा तो अगल-बगल के गांव को सुविधा मिल रही है।हम लोगों के लिए गांव में रहना दूभर हो गया है सांसद द्वारा अपने हित मित्रों को विकास का ठेका देकर सारे रास्ते को अवरुद्ध कर दिया गया। स्वच्छ जल धारा योजना एक सपना बनकर रह गया हमारे लिए।

विकास निधि के धन का सिर्फ बंदरबांट

ग्रामीण विजय मिश्रा का कहना है कि यहां पर आए विकास निधि के धन का सिर्फ बंदरबांट किया गया है हमारे समझ में यह नहीं आता कि जब सरकार दूसरे की थी तब सांसद जी बहाना करते थे लेकिन अब तो सब सांसद जी की सरकार भी अधिकारी भी तो फिर हमारे साथ यह सौतेला व्यवहार क्यों पाइप लाइन डालने के नाम पर सारे रास्तों को रद्द कर दिया गया है प्राथमिक शिक्षा के नाम पर बस गिने-चुने मास्टर हैं जिनका कोई आने जाने का टाइम नहीं है तथा एक प्राथमिक चिकित्सालय का निर्माण करा कर एक फार्मासिस्ट के जरिए यहां के लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है इससे बेहतर विकास तो अगल-बगल के गांव का है जहां सड़क बिजली पानी की व्यवस्था दुरुस्त है

प्राथमिक चिकित्सालय फार्मासिस्ट के भरोसे

शत्रुघ्न सिंह पवन कुमार सरस्वती देवी देवी शीला यहॉं पर एक फर्मासिस्ट के द्वारा प्राथमिक चिकित्सालय का संचालन कराया जा रहा है वह भी दिन में ही रहते हैं देर सबेर किसी के बीमार पड़ने पर हमको प्राइवेट स्वास्थ्य सेवाओं का सहारा लेने के लिए मजबूर होना पड़ता है इन सब के लिए प्रमुख रूप से सांसद जिम्मेदार है क्योंकि अगर वह चाहते तो यहां के लोगों की यह दुर्दशा नहीं होती इस तरह से गोद लेने से क्या फायदा जहां आप बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं करा सकते।

सांसद जी से उम्‍मीदें टूटीं

वही ग्राम प्रधान रामसहाय सिंह का कहना है कि विकास के लिए लगभग साडे चार करोड़ रुपए खर्च करने के बावजूद यह दशा हमारे ग्राम पंचायत की है। एक तरफ मैं रास्तों का निर्माण कर उनको दुरुस्त करता हूं दूसरी तरफ विकास के नाम पर उसको तोड़ कर रास्ते को अवरुद्ध कर दिया जाता है यह सौतेला व्यवहार नहीं तो क्या है हमने सोचा था कि सांसद जी का सानिध्य मिलेगा दोनों लोग मिलकर ग्राम पंचायत को विकास की जगह पर आगे बढ़ाएंगे लेकिन उपेक्षित सहयोग न मिलने से काफी परेशानी हो रही है।गलती दूसरा कोई करें अधिकारी हमको डराते हैं। जिससे विजय कुमार,रामनगीना सिंह सुमिरन सिंह,प्रमोद कुमार,पवन कुमार,शत्रुघन,श्यामादेवी,शीलादेवी,मुटुरादेवी सरस्वती आदि का कहना है कि स्थानीय सासंद द्वारा ग्राम पंचायत का विकास नही करना था तो आखिर गोद क्यों लिया गया?

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