आधार पर लोगों को मैसेज से डराने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त तेवर अपनाये हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने आधार कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने और बैंक खातों और मोबाइल नंबरों को 12 अंकों के बायोमेट्रिक पहचान संख्या से जोडऩे के खिलाफ दायर चार याचिकाओं पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा। शीर्ष अदालत ने इस मामले में यह कहते हुए कोई अंतिरम आदेश नहीं दिया कि आधार से संबंधित सारे मामलों पर संविधान पीठ नवंबर के अंतिम सप्ताह में सुनवाई शुरू करेगी। केंद्र पहले ही समय सीमा 31 दिसंबर तक बढ़ा चुका है।

जस्टिस ए के सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण की पीठ ने यह कहा कि बैंक और टेलिकॉम कंपनियों को अपने ग्राहकों को भेजे जा रहे संदेशों में बैंक खातों और मोबाइल नंबरों को आधार से जोडऩे की अंतिम तारीख के बारे में जानकारी देने चाहिए। पीठ ने कहा, हम स्पष्ट करते हैं कि बैंक और दूरसंचार सेवा प्रदाताओं द्वारा अपने ग्राहकों को भेजे जा रहे संदेशों में यह बताना होगा कि बैंक खातों और मोबाइल नंबरों को आधार से जोडऩे की अंतिम तिथि क्रमश: 31 दिसंबर, 2017 और छह फरवरी, 2018 है।
एक याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने केंद्र के हालिया हलफनामे का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें कहा गया है कि आधार को जोडऩे की अंतिम तारीख बढ़ाकर 31 मार्च 2018 की जा सकती है। पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता इस मुद्दे को उस पीठ के समक्ष उठा सकते हैं जो आधार से संबंधित सारे मामलों पर नवंबर के अंतिम सप्ताह में सुनवाई करेगी।
पीठ ने कहा, इसमें कोई संदेह नहीं है कि इन सारे तर्कों पर विचार की आवश्यकता है। मामला नवंबर के अंतिम सप्ताह में सुनवाई के लिए आ रहा है और बैंक खातों को आधार से जोडऩे की समय सीमा 31 दिसंबर तक बढा दी गई है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने 30 अक्तूबर को कहा था कि संविधान पीठ गठित की जाएगी जो नवंबर के अंत में आधार से संबंधित सारे मामलों की सुनवाई करेगी।
हाल ही में नौ सदस्यीय संविधान पीठ ने अपनी व्यवस्था में कहा था कि निजता का अधिकारी संविधान के तहत मौलिक अधिकार है। आधार की वैधता को चुनौती देने वाली अनेक याचिकाओं में दावा किया गया था कि इससे उनके निजता के अधिकार का हनन होता है। इस बीच, केंद्र ने 25 अक्तूबर को शीर्ष अदालत को सूचित किया था कि सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए आधार को जोडऩे की अनिवार्य की अवधि उन लोगों के लिये 31 मार्च, 2018 तक बढ़ा दी गई है जिनके पास आधार नहीं है और जो इसके लिये पंजीकरण कराने के इच्छुक हैं।
दूसरी ओर केंद्र सरकार ने मोबाइल नंबर को आधार से लिंक करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर किया है। इसमें कहा गया है कि उपभोक्ताओं को ई-केवाईसी वेरिफिकेशन के तहत 6 फरवरी, 2018 तक अपना मोबाइल नंबर आधार के साथ लिंक कराना अनिवार्य होगा। ऐसा ना करने पर आपकी मोबाइल सेवाएं बाधित हो सकती हैं। वहीं, नया बैंक अकाउंट ओपन कराने के लिए भी आधार अनिवार्य है।
सरकार नहीं बदल सकती अंतिम तारीख
सरकार ने कहा है कि मोबाइल नंबर को आधार से लिंक कराने की अंतिम तारीख (6 फरवरी) सरकार नहीं बदल सकती है क्योंकि इसे सुप्रीम कोर्ट ने तय किया है। साथ ही यह भी बताया कि आधार को अपने बैंक खातों के साथ लिंक कराने की आखिरी तारीख 31 मार्च कर दी गई है। आपको बता दें कि इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से 4 हफ्तों में जवाब मांगा था, जिसमें पूछा गया था कि आधार को मोबाइल नंबर से क्यों लिंक कराया जाना चाहिए? सरकार ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में साइबर हमलों से कई देश प्रभावित हुए हैं। लेकिन ढ्ढष्ठ्रढ्ढ और इसके किसी भी सर्वर पर हैकिंग या डाटा लीक होने की कोई भी घटना सामने नहीं आई है।
ध्यान रखें ये जरूरी बातें
सबसे जरूरी बात यह है कि आपका मोबाइल नंबर आधार से किसी भी तरह से घर बैठे लिंक नहीं होगा। ऐसे में अगर कोई दावा करे कि वो आपका नंबर आधार से लिंक करा देगा तो इसे नहीं मानें। ऐसा इसलिए क्योंकि आधार से मोबाइल नंबर लिंक करने के लिए आपकी बायोमेट्रिक डिटेल्स की जरूरत होगी और इसके लिए आपका होना जरूरी है। इसके बाद जैसे ही आपको आपके सेवा प्रदाता का एसएमएस मिले कि आप अपना श्व-्यङ्घष्ट अपडेट करा लें, वैसे ही आप कंपनी स्टोर पर चले जाएं। अगर आपको अब तक कोई एसएमएस नहीं आया है तो इस बारे में कस्टमर केयर कॉल कर के पता करें।
आपका मोबाइल नंबर ऐसे होगा आधार से लिंक
कंपनी स्टोर जाकर एग्जीक्यूटिव को अपना मोबाइल नंबर और आधार कार्ड की डिटेल्स दें। वेरिफिकेशन के बाद आपके मोबाइल पर एक वेरिफिकेशन कोड आएगा। इसे एग्जीक्यूटिव को बताकर कन्फर्म करें। इसके बाद आपकी बायोमेट्रिक डिटेल्स ली जाएंगी। 24 घंटे के भीतर आपको एक और वेरिफिकेशन कोड आएगा। आपको इस मैसेज का जवाब ङ्घद्गह्य (ङ्घ) में देना होगा। इस तरह आपका आधार आपके मोबाइल नंबर से लिंक हो जाएगा।

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