नीतीश की मजबूरी, लालू हैं जरूरी

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Nitish Kumar addressing press conferenceलालू यादव अब बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और जदयू के वरिष्ठ नेता नीतीश कुमार के लिए मजबूरी बन गए हैं। नीतीश ने बागी विधायकों का साथ लेकर राज्य की जीतन राम मांझी सरकार को अस्थिर करने के भाजपा के गेम प्लान को विफल करने के लिए करीब दो दशक पुरानी अपनी राजनीतिक दुश्मनी को भुलाकर लालू प्रसाद यादव से राज्यसभा के उप चुनाव में जदयू उम्मीदवार को समर्थन देने की अपील की है।
पटना स्थित जदयू के प्रदेश कार्यालय में मीडिया से बात करते हुए नीतीश ने कहा, मैंने लालू प्रसाद, कांगे्रस के राज्य प्रमुख आशोक चौधरी और उसके विधायक दल के नेता सदानंद सिंह और भाकपा के सचिव राजेंद्र सिंह से बात कर बिहार से राज्यसभा सीट के लिए जद यू उम्मीदवारों के लिए समर्थन मांगा है। जदयू के दो उम्मीदवारों, राजनयिक से राजनेता बने पवन वर्मा और गुलाम रसूल बलयावी को दो निर्दलीय उम्मीदवारों रियल एस्टेट के बेताज बादशाह अनिल शर्मा और साबिर अली से कड़ी चुनौती मिल रही है क्योंकि उन्हें पार्टी के असंतुष्टों और भाजपा का समर्थन हासिल है। पार्टी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने तीनों धर्मनिरपेक्ष दलों से भाजपा की उस कोशिश को विफल करने की अपील की जिसके तहत वह जीतन राम मांझी सरकार को अस्थिर कर बिहार में जल्द चुनाव कराने का मंसूबा बांध रही है।
यह पूछने पर कि अपने धुर विरोधी लालू से बात करना उनकी राजनीतिक बाध्यता थी, नीतीश ने कहा, नहीं, यह राजनीतिक परिस्थिति के कारण किया गया।नीतीश कुमार ने कहा कि यह पूरा का पूरा मामला भाजपा की राज्यसभा चुनाव के जरिए जीतन राम मांझी सरकार को अस्थिर करने की कोशिश और साजिश है। उन्होंने भाजपा पर हाल में संपन्न लोकसभा चुनाव में जीत को लेकर इतराने का आरोप लगाते हुए वह चाहते हैं कि बिहार की वर्तमान सरकार किसी तरह गिर जाए और यहां जल्द से जल्द चुनाव हों, इसके लिए वे इस राज्यसभा चुनाव को माध्यम बनाना चाहते हैं।

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