गोरखपुर। जूता कांड के चलते चर्चित हुए संतकबीरनगर के भाजपा सांसद शरद त्रिपाठी की मुसीबत कम नहीं हो रही है। इस घटना के चलते उनका टिकट संतकबीरनगर से कटा। उनके बदले उनके पिता डा. रमापति राम त्रिपाठी को देवरिया से भाजपा ने टिकट दिया लेकिन जूता कांड वहां भी शरद त्रिपाठी का पीछा कर रहा है। इसकी आंच उनके पिता के चुनाव प्रचार पर भी पड़ रहा है। जूता कांड के चलते क्षत्रिय मतों का ध्रुवीकरण न हो, इसलिए शरद त्रिपाठी अपने पिता का चुनाव प्रचार तो कर रहे हैं लेकिन मंच पर जाने से बच रहे हैं।

देवरिया में शरद त्रिपाठी के खिलाफ पहले बैनर लगाया गया और अब वहां पर्चे बांटे गए हैं। बैनर और पर्चे में उन्हें ‘ जूताधारी ’ बताते हुए मतदाताओं खासकर क्षत्रियों से उन्हें सबक सिखाने की अपील की गई है।

संतकबीरनगर के भाजपा सांसद शरद त्रिपाठी ने 6 मार्च को जिला योजना की बैठक में तू-तू-मै-मैं के बाद अपने ही पार्टी के मेंहदावल के विधायक राकेश सिंह बघेल को जूते से जमकर पीट दिया। भाजपा विधायक राकेश सिंह बघेल ने भरी सभा में श्री त्रिपाठी को जमकर गालियां दी और बाद में उनके समर्थकों ने श्री त्रिपाठी को घेर लिया। प्रशासन ने किसी तरह उन्हें एक कमरे में बंद किया आर सुरक्षा प्रदान की। विधायक समर्थक पूरी रात सैकड़ों की संख्या में कलेक्ट्रेट घेर बैठे रहे। शरद त्रिपाठी को किसी तरह सुरक्षित निकालकर भेजा गया।

इस घटना के बाद न सिर्फ संतकबीरनगर बल्कि आस-पास के जिलों में ठाकुर-ब्राह्मण तनाव बढ़ गया। इस घटना के एक महीने बाद मेंहदावल में आयोजित भाजपा सम्मेलन में जमकर हंगामा हुआ। भाजपा विधायक के समर्थकों ने सम्मेलन में सांसद शरद त्रिपाठी के खिलाफ नारेबाजी की और कुर्सियां तोड़ दी। हंगामा इतना बढ़ा कि सम्मेलन में भाग लेने के लिए आ रहे भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डा. महेन्द्र पांडेय बीच रास्ते से लौट गए।

जूता कांड से भाजपा की दिक्कतें बढ़ती गई और उसके सामने यह संकट हो गया कि संतकबीरनगर से किसे चुनाव लड़ाए। यदि शरद त्रिपाठी को चुनाव लड़ाते हैं तो क्षत्रिय नाराज हो जाएंगे और यदि वहां से क्षत्रिय को लड़ाते हैं तो ब्राह्मण नाराज हो जाएंगे। भाजपा ने बीच का रास्ता निकाला और ऐन चुनाव के वक्त सपा का साथ छोड़कर आए निषाद पार्टी के अध्यक्ष डा. संजय कुमार निषाद के बेेटे प्रवीण निषाद को यहां से टिकट दे दिया।

मकसद यह था कि क्षत्रिय और ब्राह्मण वोट आपस में न लड़ें और वे प्रवीण निषाद को बतौर उम्मीदवार स्वीकार कर लें। हालांकि संतकबीरनगर से जो खबरें आ रही हैं, उसके अनुसार भाजपा अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पायी और जूता कांड ने वहां अपना प्रभाव दिखाया है जो भाजपा के खिलाफ गया है।

जूता कांड के कारण शरद त्रिपाठी का टिकट कट गया जबकि उन्होंने मगहर में प्रधानमंत्री का कार्यक्रम करा कर उनका विश्वास अर्जित किया था। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री उनके उनकी काफी तारीफ की थी और उन्हें ‘ युवा जुझारू, सक्रिय और नम्रता व विवेक से भरे हुए श्रीमान शरद त्रिपाठी ’ कहा था।

भाजपा ने शरद त्रिपाठी का टिकट जरूर काट दिया लेकिन ब्राह्मण मतों की नाराजगी दूर करने के लिए उनके पिता डा. रमापति राम त्रिपाठी को देवरिया से टिकट दे दिया। डा. रमापति राम त्रिपाठी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। डा. त्रिपाठी भाजपा संगठन में हमेशा बड़े ओहदे पर रहे हैं। वह खुद कभी विधायक या सांसद नहीं बन पाए लेकिन कई नेताओं को टिकट दिलवाकर सांसद-विधायक जरूर बनवाया। एक बार वह महराजगंज जिले के सिसवा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े लेकिन हार गए।

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में देवरिया से भाजपा के वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र चुनाव लड़े थे और सांसद हुए थे। चुनाव जीतने के बाद उन्हें केन्द्रीय मंत्री भी बनाया गया लेकिन 75 पार उम्र का फार्मूला लगाते हुए बाद में उनसे मंत्रालय ले लिया गया। इसी आधार पर उन्हें देवरिया से टिकट भी नहीं दिया गया।

देवरिया से भाजपा से टिकट के लिए कई दावेदार थे जिनमें पूर्व सांसद श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी के बेटे शशांक मणि त्रिपाठी, पत्रकार से नेता बने शरद मणि त्रिपाठी, भाजपा के एमएलसी देवेन्द्र प्रताप सिंह प्रमुख थे। इन सभी का टिकट काटकर डा. रमापति राम त्रिपाठी को टिकट दिए जाने से स्थानीय भाजपा नेता नाराज हुए।

डा. रमापति राम त्रिपाठी के चुनाव प्रचार में सांसद शरद त्रिपाठी भी सक्रिय हैं लेकिन जूता कांड उनका पीछा नहीं छोड़ रहा है। वह चुनाव प्रचार में सार्वजनिक मंचों पर नहीं जा रहे हैं। पिता के नामांकन में वह मौजूद थे लेकिन गाड़ी में ही बैठे रहे। जन सभाओं, रोड शो में भी वह रहते हैं लेकिन गाड़ी में बैठे रहते हैं। रूद्रपुर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सभा में भी वह मंच पर नहीं दिखे। चर्चा थी कि वह सभा में मौजूद थे लेकिन वह कहीं नजर नहीं आए।

भाजपा के सूत्रों ने बताया कि शरद त्रिपाठी ने अब अपना डेरा देवरिया संसदीय क्षेत्र के तमकुहीराज, फाजिलनगर क्षेत्र में केन्द्रित कर दिया है जो ब्राह्मण व भूमिहार बहुल है। वह गौरीबाजार, रूद्रपुर के क्षत्रिय व सैंथवार गांवों की तरफ जाने से बच रहे हैं।

मंचों पर न दिखने के पीछे शरद त्रिपाठी और उनके पिता डा. रमापति राम त्रिपाठी का यह मकसद है कि कहीं इससे क्षत्रिय मतों का ध्रुवीकरण न हो जाए।

क्षत्रिय मतों के ध्रुवीकरण न होने देने के शरद त्रिपाठी का सचेत प्रयास भी काम नहीं आया। दस दिन पहले देवरिया के सुभाष चैक पर अल सुबह लोगों ने एक बैनर देखा जिस पर लिखा था कि ‘ क्षत्रियों को जूता मारने वाला बेटा और व्यापारियों, महिलाओं को धमकी, गाली देने वाला बाप खलीलाबाद से भगाए जाने के बाद अब देवभूमि देवरिया के वोटरों को चारा डालने आए हैं। ’ यह बैनर देवरिया बचाओ मंच के नाम से लगाया गया था। इस बैनर को कुछ समय बाद हटा दिया गया।

कल देवरिया में एक पर्चा बांटा गया है। इस पर्चे ‘ क्षत्रिय समाज ’ के नाम से बांटा गया है। इस पर्चे के प्रारम्भ में दो पंक्तियां -हेलमेट की करो तैयारी , आ गए हैं जूताधारी ’ लिखा गया है। पर्चे का शीर्षक ‘ रामपति राम त्रिपाठी का विरोध ’ दिया गया है। इस पर्चे में कहा गया है कि सांसद शरद त्रिपाठी ने संतकबीरनगर में मेंहदावल के विधायक राकेश सिंह बघेल के सिर पर एक मिनट में 13 जूता मारने का विश्वरिकार्ड बनाया है। अब वह अपने जूतों के साथ देवरिया मेें चुनाव लड़ने आए हैं।’

इस पर्चे में क्षत्रिय समाज से जूते का जवाब लोकतांत्रिक तरीके दिए जाने की अपील करते हुए गठबंधन प्रत्याशी को वोट देने की अपील की गई है।

यह पर्चा देवरिया जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। देवरिया में यह भी चर्चा चल रही है कि मेंहदावल के भाजपा विधायक राकेश सिंह बघेल ने देवरिया का गुपचुप दौरा किया। उनका दौरा क्षत्रिय बहुल गांवों में हुआ हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है

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