लालू हुए बे ‘चारा’, नीतीश को भाई मोदी की गोदी

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याद करिये वो दौर जब मोदी को प्रधानमंत्री को चेहरा बनाने की घोषणा भाजपा ने की थी और नीतीश ने भाजपा से नाता तोड लिया था। बिहार के सीएम नीतीश कुमार को कुछ दिन पहले तक मोदी के खिलाफ लोकसभा चुनाव में उतारने की तैयारी थी। लेकिन मोदी ने एक झटके में ही नीतीश को अपने पाले में कर न सिर्फ लालू बल्कि कांग्रेस को भी चारो खाने चित कर दिया।
महागठबंधन 20 महीने की साझेदारी के बाद, नीतीश कुमार के इस्तीफे से अपने अंजाम तक पहुंच गया है। 2015 में बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनजर जदयू, राजद और कांग्रेस साथ आई। तीनों पार्टियों ने मिलकर महागठबंधन बनाया जो 20 महीने की साझेदारी के बाद, नीतीश कुमार के इस्तीफे से अपने अंजाम तक पहुंच गया है। नीतीश ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया लेकिन 24 घंटे से भी कम समय में वह दोबारा बीजेपी के समर्थन से सत्ता पर काबिज होंगे। आइए जानते नीतीश कुमार के दोबारा बीजेपी के करीब आने के पूरे घटनाक्रम को। नीतीश की बीजेपी सरकार से करीबी के कयास नवंबर 2016 से लगने शुरू हुए। नीतीश ने केंद्र सरकार की नोटबंदी के फैसले का समर्थन किया।
जनवरी 2017 में पीएम नरेंद्र मोदी ने नीतीश की शराबबंदी के फैसले के लिए तारीफ की। इसके बाद अप्रैल 2017 में बीजेपी के सुशील मोदी ने लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। आरोप के बाद सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय ने जांच शुरू की। इसके बाद मई 2017 से नीतीश की महागठबंधन से दूरियां नजर आने लगीं। नीतीश, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा आयोजित भोज और बैठक से नदारद होते हैं लेकिन पीएम मोदी द्वारा मॉरीशस के प्रधानमंत्री के सम्मान में आयोजित भोज में वह शामिल होते हैं। जून 2017 में राष्ट्रपति चुनाव में नीतीश कुमार ने महागठबंधन से अलग जाकर एनडीए उम्मीदवार रामनाथ कोविंद का समर्थन किया। नीतीश कुमार उन चुनिंदा मुख्यमंत्रियों में थे जिन्होंने 22 जुलाई को पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से सम्मान में, पीएम मोदी द्वारा आयोजित भोज में शिरकत की।
आखिर में 25 जुलाई को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के शपथ ग्रहण समारोह में भी नीतीश कुमार संसद के सेंट्रल हॉल में मौजूद नजर आते हैं। बता दें यह पहली बार नहीं है जब नीतीश कुमार बीजेपी के करीब आए हों। 1990 में बिहार में जनता दल की सरकार बनी जिसमें लालू सीएम बनें और नीतीश कुमार को कैबिनेट में जगह मिली। लेकिन यह साझेदारी ज्यादा समय तक नहीं चल सकी और 1994 में नीतीश ने लालू से अलग होकर, जॉर्ज फर्नांडीस के साथ समता पार्टी बनाई। 1996 के लोकसभा चुनाव में समता पार्टी ने बीजेपी के साथ गठबंधन किया था।

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