विकास में अखिलेश से कहीं आगे निकल गए मोदी

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वाराणसी में अखिलेश की वरूणा कॉरीडोर परियोजना लटकी जबकि मोदी का ट्रेड फैसिलिटिशेन सेंटर का काम लगभग पूरा हो चला है। प्रधानमंत्री मोदी जल्द ही इसका उदघाटन कर सकते हैं। अखिलेश अपनी जनसभाओं में विकास के दावे कर रहे हैं लेकिन विकास के पायदान पर राजधानी लखनऊ ही 25 पायदान नीचे आ गई है। हकीकत यह है कि अखिलेश सरकार के विकास के पैमाने मेट्रो व आगरा लखनऊ एक्सप्रेस वे ही हैं। बाढ़ के चलते सीएम अखिलेश को वरूणा कॉरीडोर डूब गया था और बाढ़ के चलते पीएम मोदी की महत्वपूर्ण योजना गंगा परिवहन के लिए इतना पानी हो गया था कि वाराणसी से हल्दिया तक के लिए मालवाहक जहाज को रवाना किया गया। पीएम मोदी ने काशी के लिए जितनी योजना बनायी है उसमें से अधिकांश पूर्ण होने वाली है और कुछ का लाभ भी लोगों को मिलेगा लगा है। फिलहाल यूपी में होने वाले चुनाव में विकास की जंग में पीएम मोदी अपने संसदीय क्षेत्र में सीएम अखिलेश से आगे निकलते जा रहे हैं।
भारी पड़ रही है कुनबे की कलह
यूपी में वर्ष 2017 में होने वाले विधानसभा चुनाव में सपा और बीजेपी ने विकास को ही मुख्य मुद्दा बनाया है। सीएम अखिलेश ने यूपी में सबसे अधिक विकास करने की बात कहते हुए चुनाव प्रचार में जुटे हैं तो वहीं दूसरी तरफ बीजेपी ने पीएम मोदी के विकास व नीतियों को ही मुख्य मुद्दा बनाया है। ऐसे में विकास की चल रही जंग में एक बार फिर सीएम अखिलेश से पीएम मोदी आगे निकल गये हैं। सपा कुनबे की कलह अब सीएम अखिलेश पर भारी पड़ती जा रही है। सीएम अखिलेश की तमाम योजना अब पिछड़ती जा रही है। पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की बात की जाये तो यहां पर पीएम मोदी व सीएम अखिलेश की विकास योजनाओं में रेस लगी हुई थी। पीएम मोदी ने यहां पर ट्रेड फैसिलिटिशेन सेंटर की नींव रखी थी। संसदीय चुनाव जीतने के बाद काशी आये पीएम ने इस भवन की आधारशीला रखी थी लेकिन बाद में विभिन्न औपचारिकताओं के चलते यह काम नहीं शुरू हो पाया था और विपक्षी दलों ने पीएम मोदी पर जम कर निशाना साधा था। बाद में योजना को लेकर पीएमओ हरकत में आया और तेजी से भवन निर्माण शुरू हुआ। लालपुर में काशी की बुनकरी को नया मुकाम देने के लिए बन रहे इस सेंंटर पर 280 करोड़ रुपये का बजट खर्च होना है। सेंटर के निर्माण के लिए जून 2017 की समय सीमा रखी गयी थी लेकिन हालत यह है कि सेंटर को 80 प्रतिशत से अधिक काम पूर्ण हो चुका है और अगले माह पीएम मोदी इस सेंटर का उद्घाटन कर सकते हैं। सेंटर बनने के साथ ही पीएम मोदी के विरोधी बैकफुट पर आ गये है। यूपी चुनाव में यह सेंटर बीजेपी के बहुत काम आ सकता है।
सीएम अखिलेश ने वरूणा की दशा सुधारने के लिए वरूणा कॉरीडोर परियोजना शुरू की है। मार्च 2016 से वरूणा कॉरीडोर को लेकर तेजी से काम शुरू हुआ। एक समय बाद ऐसा लगने लगा कि इसी साल यह योजना बन कर तैयार हो जायेगी। इस साल बारिश अच्छी होने से बाढ़ आयी और फिर सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट पर ग्रहण लग गया। एक माह से अधिक समय से वरूणा कॉरीडोर पानी में डूबा रहा। इसके बाद जब बाढ़ का पानी हटा तो सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के परिवार में बेटे सीएम अखिलेश व भाई शिवपाल यादव को लेकर मतभेद हो गये। सपा कुनबे के मतभेद का असर हुआ कि सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट को लेकर अधिकारियों को रवैया सुस्त हो गया। आज स्थिति यह है कि वरूणा कॉरीडोर का मार्च 2017 तक पूरा होना कठिन हो गया है। ऐसे में पीएम मोदी की योजना आगे निकल गयी है और सीएम अखिलेश का वरूणा कॉरीडोर अधिकारियों की कार्यशैली की भेंट चढ़ता जा रहा है।

इससे पहले भी सीएम अखिलेश को लग चुका है झटका
इससे पहले भी सीएम अखिलेश को पीएम मोदी से बड़ा झटका लग चुका है। बाढ़ के चलते सीएम अखिलेश को वरूणा कॉरीडोर डूब गया था और बाढ़ के चलते पीएम मोदी की महत्वपूर्ण योजना गंगा परिवहन के लिए इतना पानी हो गया था कि वाराणसी से हल्दिया तक के लिए मालवाहक जहाज को रवाना किया गया। पीएम मोदी ने काशी के लिए जितनी योजना बनायी है उसमें से अधिकांश पूर्ण होने वाली है और कुछ का लाभ भी लोगों को मिलेगा लगा है। फिलहाल यूपी में होने वाले चुनाव में विकास की जंग में पीएम मोदी अपने संसदीय क्षेत्र में सीएम अखिलेश से आगे निकलते जा रहे हैं।

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