सपा की दुर्दशा के बाद अब निगाहें भाजपा की ओर

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लखनऊ टीम न्यूज नेटवर्क 24

राजधानी में एक ओर जहां मौसम का पारा गिर रहा है वहीं दूसरी ओर समाजवादी पार्टी में चल रही उठापटक ने सियासी पारा चढ़ा दिया है। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सपा परिवारवाद की भेंट चढ़ गई। बाप ने अपने बेटे को ही पार्टी से निकाल दिया। राजनीति के इतिहास में पहला उदाहरण है जब कोई मुख्यमंत्री अपनी ही पार्टी द्वारा निकाला गया हो। सत्ता में फिर आने को आतुर अखिलेश कांग्रेस के साथ जा सकते हैं तो मुलायम ने कल सभी पार्टी उम्मीदवारों की बैठक बुलाई है। आखिरी सांसें गिनती बसपा के साथ ही सपा भी अब बिखर गइ है। सबकी निगाहें अब मोदी जी औैर भाजपा की ओर हैं।
भाजपा का होगा फायदा
पिछले दो दिनों से लगातार बदल रहे घटनाक्रम पर सभी राजनीतिक दलों की नजर बनी हुई है। राजनीतिक विशलेषकों का मानना है अभी तक पहले नंबर पर भाजपाए दूसरे पर सपा तीसरे पर बसपा और कांग्रेस चौथे पर बनी हुई है। इस घटनाक्रम का सीधा फायदा भाजपा को ही मिलेगा और उसकी सीट संख्?या व वोट प्रतिशत में खासी बढ़ोतरी होगी।
जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश
वहीं कुछ जानकारों का मानना है कि सपा की पूरी ड्रामेबाजी जनता का ध्यान समस्याओं से हटाने के लिए हैं। दरअसलए प्रदेश की कानून-व्यवस्था का हाल किसी से छिपा नहीं है। अपराधी बेखौफ वारदातें कर रहे हैं और पुलिस दिखावे की तफ्तीश कर खानापूर्ति कर रही है। इतना ही नहीं पिछले कुछ महीनों में मेट्रो, जेपी सेंटर, रिवर फ्रंट, आगरा एक्सप्रेस-वे जैसे प्रोजेक्ट्स के पूरे होने से पहले ही उद्घाटन कर जो खेल अखिलेश सरकार ने किए हैं अब उनसे पर्दा उठने लगा है। जनता के बीच सच्चाई न पहुंच जाए इसलिए सपा ने नूरा कुश्ती का खेल रच दिया है।

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