पंजाब में गाय, कुत्ता-बिल्ली पर भी लगेगा टैक्स

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जीएसटी की मार कहां तक हो रही है, इसे समझने के लिए पंजाब सरकार का ताजा कदम काफी है। राज्य की अमरिंदर सरकार ने अब गाय, कुत्ता-बिल्ली व अन्य जानवरों को पालने पर भी टैक्स लगा दिया है। यह टैक्स स्थानीय निकाय विभाग वसूल करेगा। इस विभाग के मंत्री कांग्रेस नेता, लाफ्टर किंग, और पूर्व क्रिकेटर नवजोतसिंह सिद्धू हैं। इसके लिए पंजाब स्थानीय निकाय विभाग ने बाकायदा नोटिफिकेशन जारी कर नगर निगमों को भेज दिया है, जिसे जल्द मंजूरी देकर लागू कर दिया जाएगा। वैसे पंजाब सरकार गो सेस के नाम से कई वस्तुअों पर पहले ही टैक्स वसूली कर रही है, लेकिन घरों में जानवर पालने पर कर वसूली का फंडा अमरिंदर सरकार को ही सूझा है। लिहाजा देशभर में इसकी चर्चा है और करारोपण में ‘इनोवेटिव आइडिया’ का यदि कोई पुरस्कार हो तो पंजाब सरकार उसकी सच में हकदार है।
देश में पालतू पशुअों जैसे कुत्ता, बिल्ली, गधा, घोड़ा,सुअर, गाय भैंस आदि पालने के लिए शहरों में नगरीय निकायों से लायसेंस लेने का रिवाज पहले से है। यह व्यवस्था मध्यप्रदेश के शहरों में भी लागू है। इसके लिए नाममात्र का शुल्क देना होता है। यह लायसेंस हर साल रिन्यू कराना पड़ता है। लेकिन पंजाब सरकार इसके एक कदम आगे निकल गई लगती है। उसने लायसेंस के साथ जानवर पालने को भी टैक्स की जद में ले लिया है। इसके तहत आपने घर में अगर कुत्ता, बिल्ली, सूअर, बकरी, खच्चर , बछड़ा, भेड़, हिरण आदि पालने वाले लोगों को 250 रुपए प्रति वर्ष देने पड़ेंगे। अगर भैंस, सांड, ऊंट, घोड़ा, गाय, हाथी और नील गाय आदि पाले हों तो सरकार आप से 500 रू. सालाना वसूल करेगी। इस टैक्स की वसूली भी सख्ती से होगी । यानी टैक्स समय पर नहीं भरा तो जानवर के मालिक पर 10 गुना तक ज्यादा जुर्माना लगेगा। नियम यह भी है कि जानवरों के मालिक को म्युनिसिपल कॉरपोरेशन से एक टैग मिलेगा, जिस पर जानवर का रजिस्ट्रेशन नंबर और मालिक का नाम लिखा होगा। अगर लायसेंसशुदा जानवर तीन बार सड़क पर आवारा घूमता पाया गया तो उसका रजिस्ट्रेशन नंबर रद्द कर दिया जाएगा।
वैसे पालतू जानवरों को लेकर ऐसी ‘अभिनव’ योजना कोई नई बात नहीं है। पंजाब के पड़ोसी राज्य हरियाणा ने पिछले दिनो एक ऐसा प्रोजेक्ट शुरू करने का ऐलान किया था कि जिसके बारे में शायद ही पहले सुना हो। वहां सरकार राज्य के सभी मुख्य शहरों में गाय और भैंसों के लिए पीजी हॉस्टल बनाने का प्लान कर रही है। माना जा रहा है प्रोजेक्ट की शुरुआत हिसार से की जाएगी। इसका मकसद शहरी इलाकों में रह रहे लोगों को मवे‍शी पालने में मदद करना तथा राज्य में दूध का उत्पादन बढ़ाना है। साथ ही इन होस्टलों के माध्यम से गो सेवा होगी, सो अलग।
होगा।
लेकिन यहां मुद्दा सरकारी खजाना भरने के लिए कराधान के नए क्षेत्रों को खोजने वाले फर्टाइल दिमाग का है। क्योंकि अभी तक लोग पशु प्रेम अथवा जानवर पालने का शौक के चलते प्राणियों को घर में पालते पोसते रहे हैं। ये वो खुशकिस्मत चौपाए होते हैं, जो अच्छा खा- पी कर और जरूरत से ज्यादा लाड़ प्यार से खासे मोटे तगड़े हो जाते हैं। कुत्तों और बिल्लियों के मामले में मालिकों को इतनी मोहब्बत हो जाती है कि वो एक बार भूखे इंसान को रोटी न दें पर डाॅगी को प्रोटीन के बिस्कुट बिला नागा खिलाते हैं। यही हाल पालतू बिल्लियों का है। पहले ही आलसी बिल्लियां दिलदार मालिक या मालकिन का साथ पाकर महाआलसी और नखरैल बन जाती हैं। हो सकता है, टैक्स लगाने के बाद इन प्राणियों को पालने वालों की मोहब्बत में कुछ कमी आए। ऐसे में इन पालतू प्राणियों की परवरिश पर टैक्स लगाकर पंजाब सरकार ने उन्हें ऊंची हैसियत ही बख्शी है।
इसमें पेंच केवल इतना है कि पंजाब सरकार ने यह तो बता दिया कि टैक्स किन- किन जानवरों पर कितना कितना लगेगा, पर यह नहीं बताया‍ कि पशु पालन पर आयद इस कर से सरकार को सालाना आय कितनी होगी, उसके खजाने का कितना घाटा कम होगा। हो सकता है कि राज्य सरकार जानवरों को पालना भी लक्जरी शौक मानती हो।
लगता है मोदी सरकार द्वारा देश में जीएसटी लागू करने के बाद राज्य सरकारों के पास पेट्रोल डीजल और दारू के अलावा कोई ऐसी खास चीज नहीं बची है, जिसपर टैक्स लगाकर अपने को राजा समझ सके। ऐसे में पंजाब सरकार को यही वह इलाका नजर आया, जहां से महसूल मिल सकता है। इशारा साफ है कि जानवर पालो तो टैक्स दो वरना कुत्ते बिल्ली या दूसरे जानवर पालना छोड़ दो। आश्चर्य नहीं कि कल को अंडे देने वाली मुर्गी पर भी प्रति अंडा टैक्स लग जाए। क्योंकि राज्य सरकारें अपनी आय और संसाधन बढ़ाने की जी तोड़ कोशिश कर रही हैं। हालांकि सोशल मीडिया में इसका भी मजाक बन रहा है। याद रहे कि जिस विभाग ने यह नया टैक्स लगाया है, उसके मंत्री नवजोत सिद्धू ‍हैं। सिद्धू की खासियत यह है कि वे हर वक्त काॅमेडी शो के मूड में रहते हैं। लिहाजा राजनीति, सरकार, प्रशासन और ठहाको में ज्यादा फरक नहीं करते। हो सकता है यह उन्हीं के दिमाग की उपज हो या फिर वे अपने किसी पड़ोसी या मुहल्लेदार द्वारा कुत्ते- बिल्ली अथवा मवेशी पालने से परेशान रहे हों और इसका बदला इन प्राणियों के पालन पोषण को भी कर योग्य बनाकर ले रहे हों। अहम सवाल है कि इसके आगे क्या? क्या घर में चींटियां निकलने या मधुमक्खी द्वारा छत्ता बना लेने पर भी टैक्स लगेगा? क्योंकि यह भी प्राणी पालन की श्रेणी में आ सकता है। और यह कोई ‘टैक्स काॅमेडी’ नहीं होगी !

अजय बोकिल

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