शहाबुद्दीन पर कोर्ट की तलवार, सेना का लोकतंत्र पर वार!

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Asif Ali Zardari Makhdoom Shahabuddin

पाकिस्तान के अगले पीएम बनने जा रहे मखदूम शहाबुद्दीन पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है। रावलपिंडी की एक अदालत ने गुरुवार को शहाबुद्दीन के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी किया। यह वारंट पीपीपी की ओर से शहादुद्दीन को नया पीएम मनोनीत करने के कुछ घंटे बाद ही जारी हुआ है। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने गुरुवार सुबह शहाबुद्दीन के नाम का ऐलान किया। पाकिस्तान के सरकारी टेलीविजन चैनल पीटीवी के हवाले से आई खबर के मुताबिक राजा परवेज अशरफ को वैकल्पिक उम्मीदवार बनाने पर भी सहमति हुई है। शुक्रवार को नए पीएम के नाम पर वोटिंग होनी है। हालांकि अभी तक यह साफ नहीं हो सका है कि गिरफ्तारी वारंट से शहाबुद्दीन के नॉमिनेशन पर कोई फर्क पड़ेगा या नहीं। शहाबुद्दीन ने वारंट जारी होने के बाद भी पीएम पद के लिए पर्चा दाखिल कर कर दिया है। पीपीपी नेता कमर जमां कैरा और जेयूआई के चीफ मौलाना फजलुर रहमान ने भी पर्चा भरा है। एएनपी नेता और सांसद हाजी अदील ने कहा है कि उनकी पार्टी शहाबुद्दीन की उम्?मीदवारी का पूरी तरह समर्थन करती है शहाबुद्दीन के स्वास्थ्य मंत्री के कार्यकाल के दौरान बड़े पैमाने पर एफिड्रीन नाम की दवा के आयात में कथित गड़बड़ी हुई थी। एंटी नारकोटिक्स फोर्स के अनुरोध पर स्पेशल कोर्ट ने शहाबुद्दीन और पूर्व पीएम यूसुफ रजा गिलानी के खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट जारी किया है। जज ने अधिकारियों को निर्देश दिया है वो शहाबुद्दीन और गिलानी को गिरफ्तार कर एक हफ्ते के भीतर अदालत में पेश करें। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस इफ्तिखार चौधरी की अगुवाई तीन सदस्यीय बेंच ने मंगलवार को प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी को अयोग्य करार दिया था और उसके बाद से पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता वाली स्थिति बनी हुई है।  मखदूम शहाबुद्दीन मौजूदा कैबिनेट में कपड़ा मंत्री हैं। शहाबुद्दीन गिलानी की तरह आध्या?त्मिक परिवार से संबंध रखते हैं जो सूफी संत शाह-रुख-ए आलम के मकबरे संरक्षक भी हैं। शहाबुद्दीन 2008 से गिलानी के कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण मंत्रालय की जिम्मेदारी बखूबी निभा चुके हैं। पंजाब के वहीम यार खान से सांसद शहाबुद्दीन फरवरी 2011 में पाकिस्तान के विदेश मंत्री बने थे। इससे पहले मखदूम शहाबुद्दीन पाकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्री रह चुके हैं। शहाबुद्दीन 1994 में पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के लिए पहली बार चुने गए थे। 2008 में जब दोबारा चुने गए तो उन्हें योजना और विकास मंत्रालय की कमान सौंपी गई।
राजनीतिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान में तख्तापलट हो चुका है। जरदारी को बचाने के चक्कर में गिलानी जा चुके हैं। जरदारी के लिए आने वाले दिन बहुत अच्छे नहीं होंगे। पाकिस्तान में सैन्य शासन से भी इनकार नहीं किया जा सकता। तेजी से बदलते घटनाक्रम में यूसुफ रजा गिलानी की जगह पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी ने बुधवार सुबह हुई बैठक के दौरान मख्दूम शहाबुद्दीन को प्रधानमंत्री पद के लिए चुन लिया है। संसद की आपात बैठक में सदन के नेता की औपचारिक घोषणा कर दी जाएगी। वहीं देश में जल्द ही आम चुनाव भी करवाए जा सकते हैं।
इस बीच पाक मीडिया में आज सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर बहर छिड़ी रही। कुछ अखबारों ने इसको न्यायिक तानाशाही मानकर इसकी आलोचना की है तो कुछ ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट को इस मुद्दे को दूसरे तरीके से सुलझाना चाहिए था। वहीं गिलानी के जाने से खुश पूर्व प्रधानमंत्री की पीएमएल ने रैली निकाली और जगह जगह मिठाई बांटकर अपनी खुशी का इजहार किया। वहीं सुप्रीम कोर्ट पर यह कहकर अंगुली उठाई जा रही है कि चीफ जस्टिस इफ्तिखार चौधरी के पुत्र पर चले मुकदमे की वजह से गिलानी के खिलाफ इस तरह का फैसला लिया गया है।हालांकि पीपीपी ने अभी तक नए प्रधानमंत्री के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। पार्टी की दोपहर को होने वाली बैठक के बाद इसकी घोषणा हो सकती है।इससे पूर्व मंगलवार को पाक सुप्रीम कोर्ट ने गिलानी की बर्खास्तगी का आदेश पारित करने के बाद राष्ट्रपति को निर्देश दिया था कि वह जल्द से जल्द नए प्रधानमंत्री का ऐलान करें। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब गिलानी पांच वर्षो तक कोई चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।
जानकारों का मानना है कि इस फैसले से गिलानी का राजनैतिक करियर लगभग खत्म हो जाएगा। वहीं जानकार यह भी मानते हैं कि पाक के बदलते राजनीतिक घटनाक्रम का असर भारत और पाक के संबंधों पर नहीं पड़ेगा।
मंगलवार को पाक सरकार और न्यायपालिका के बीच चल रहे टकराव में आखिरकार प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी की बलि चढ़ ही गई। मंगलवार को चीफ जस्टिस इफ्तिखार चौधरी की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने गिलानी को अयोग्य घोषित कर दिया। अब गिलानी की सदस्यता खत्म हो गई और वह पांच साल तक सांसद का चुनाव भी नहीं लड़ पाएंगे। इस नाटकीय घटनाक्रम की वजह से राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने रूस यात्रा स्थगित कर दी है। इससे पहले चीफ जस्टिस चौधरी ने कहा कि गिलानी 26 अप्रैल को अवमानना के दोषी पाए गए थे। उनकी संसद सदस्यता तभी से प्रतिबंधित है और प्रधानमंत्री का पद भी उसी दिन से रिक्त माना जाएगा।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग गिलानी को अयोग्य घोषित करने के लिए नोटिफिकेशन जारी करेगा, जिसके बाद राष्ट्रपति को जम्हूरियत कायम रखने के लिए जरूरी कार्रवाई करनी होगी। कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए चुनाव आयोग ने मंगलवार देर रात गिलानी को अयोग्य ठहराए जाने के संबंध में नोटिफिकेशन जारी कर दिया।
दूसरी ओर सत्तारूढ़ पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी पीपीपी ने फैसले को स्वीकार कर लिया है। गिलानी जल्द ही इस्तीफे की घोषणा कर देंगे। पार्टी ने आपात बैठक बुलाई है, जिसमें नए प्रधानमंत्री के नाम पर चर्चा हो रही है। खबर है कि पीपीपी बुधवार को नए प्रधानमंत्री के नाम की घोषणा कर सकती है। इस पद के लिए संघीय मंत्री चौधरी अहमद मुख्तार, मख्दूम शहाबुद्दीन और खुर्शीद शाह का नाम सबसे आगे हैं।

pakistan-supreme-court-disqualified-gilani-as-pmसुप्रीम कोर्ट ने गिलानी को राष्ट्रपति जरदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले खोलने के आदेश दिए थे। कोर्ट ने कहा था कि जरदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले खोलने के लिए प्रधानमंत्री स्विट्जरलैंड सरकार को पत्र लिखें, लेकिन गिलानी ने ऐसा नहीं किया। उनका कहना था कि जरदारी देश के राष्ट्रपति हैं और उन्हें विशेष छूट प्राप्त है। जरदारी और उनकी दिवंगत पत्नी बेनजीर भुट्टो को स्विस अदालत ने 2003 में करोड़ों डालर की हेरा-फेरी का दोषी ठहराया था।

विपक्षी दलों व अन्य स्वतंत्र याचिकाओं में नेशनल असेंबली की स्पीकर फहमिदा मिर्जा के उस फैसले पर सवाल उठाए गए थे, जिसमें उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की अवमानना का दोषी ठहराए जाने के बाद भी गिलानी को अयोग्य घोषित करने से इन्कार कर दिया था। फहमिदा ने अपने निर्णय में कहा था कि गिलानी को अयोग्य ठहराने का कोई कारण उन्हें दिखाई नहीं देता, इसलिए वह चुनाव आयोग को सिफारिश नहीं भेज रही हैं। अदालत ने गिलानी को कुछ सेकेंड की प्रतीकात्मक सजा भी सुनाई थी।पाकिस्तान में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए बुधवार को नवाज शरीफ की पाकिस्तान मुस्लिम लीग ने कई जगह रैली निकालकर अपनी खुशी व्यक्त की है। वहीं पार्टी ने जगह जगह मिठाईयां बांटी। इस मौके पर नवाज शरीफ ने कहा है कि यूसुफ रजा गिलानी की बदौलत देश की छवि को नुकसान पहुंचा है। वहीं गिलानी के विरोधी और अन्य विपक्षी पार्टियों ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अपनी खुशी का इजहार किया है
पाकिस्तान प्रधानमंत्री को अयोग्य करार देने और उन्हें पद से बर्खास्त करने के फैसले की पाक मीडिया में बड़ी तीखी आलोचना हुई है। जहां कई अखबारों ने इसको सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक तानाशाही बताया है वहीं कुछ ने लिखा है कि इस फैसले से पाक के संघीय ढांचे में कोई बदलाव नहीं होगा।द न्यूज इंटरनेशनल ने अपने संपादकीय में लिखा है कि पाक शीर्ष कोर्ट के इस फैसले को टालना बेहद मुश्किल था। हालांकि अखबार ने माना है कि इस फैसले से पाक के संघीय स्वरूप में कोई बदलाव नहीं होगा न ही कोई नुकसान होगा। द डान के मुताबिक लोकतात्रिक तरीके से चुने गए मौजूदा पीएम को अयोग्य ठहराकर शीर्ष कोर्ट ने बेहद दुर्भाग्यपूर्ण कदम उठाया है। द ट्रिब्यून और डेली टाइम्स ने भी पीएम गिलानी को हटाए जाने को न्यायिक तख्तापलट करार दिया है। ट्रिब्यून ने भी माना है कि इस मसले को सुलझाने के लिए दूसरे तरीकों का भी इस्तेमाल किया जाना चाहिए था। पाक में सत्तारूढ़ दल के नेताओं का आरोप है कि चीफ जस्टिस इफ्तिखार चौधरी के पुत्र पर चल रहे मुकदमे की वजह से ही गिलानी को अयोग्य ठहराने का फैसला दिया गया है। गौरतलब है कि इफ्तिखार चौधरी के पुत्र पर पाक के प्रोपर्टी किंग से अपने उसके खिलाफ चल रहे मामले को अपने पक्ष में करने के लिए 342 मिलियन रुपये लिए थे। नेताओं का आरोप है कि इसके खुलासे के बाद ही सुप्रीम कोर्ट ने गिलानी के खिलाफ यह असंवैधानिक फैसला सुनाया है।
पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी को इस पद के लिए अयोग्य घोषित कर दिया और कहा कि बीते 26 अप्रैल को अदालती अवमानना के मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद से ही वह अयोग्य हैं। देश की सबसे बड़ी अदालत ने राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी से भी कहा कि वह लोकतंत्र को कायम रखने के लिए संवैधानिक भूमिका निभाएं। स्थानीय टीवी चैनलों ने खबर दी है कि अदालत ने जरदारी को नया प्रधानमंत्री चुनने का आदेश दिया है|

वहां की सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री यूसुफ रज़ा गिलानी को अयोग्य घोषित कर दिया है। इस आदेश के साथ गिलानी का बतौर प्रधानमंत्री पद खाली हो गया है और उनके नेतृत्व वाली कैबिनेट के फैसलों की कानूनी अहमियत खत्म हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट का आदेश बीती 26 अप्रैल से लागू हुआ है। इसका मतलब है कि 26 अप्रैल के बाद गिलानी के नेतृत्व में उनकी कैबिनेट के तकरीबन सभी फैसले कानूनी तौर पर खारिज कर दिए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि गिलानी नए प्रधानमंत्री को नियुक्त करें। पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) ने बयान जारी कर कहा है कि पार्टी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करती है। गिलानी के अयोग्य घोषित होने के बाद पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री के ऐलान की अटकलें तेज हो गई हैं। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक पाकिस्तान के पंजाब सूबे से आने वाले पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) के नेता मखदूम शहाबुद्दीन और चौधरी अहमद मुख्तार में से कोई एक पाकिस्तान का नया प्रधानमंत्री बन सकता है। पीपीपी नए प्रधानमंत्री का ऐलान आज रात 9.30 बजे हो सकता है। गिलानी को 26 अप्रैल को अदालत की अवमानना का दोषी ठहराया गया था। उन्?हें सुप्रीम कोर्ट ने सांकेतिक सजा भी दे दी थी। गौरतलब है कि पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने वहां के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों को देखते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री यूसुफ रज़ा गिलानी को उनके खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया था। लेकिन गिलानी ने पाकिस्तान के संविधान का हवाला देते हुए कहा था कि वहां के राष्ट्रपति किसी भी कानूनी कार्रवाई से आज़ाद हैं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने गिलानी की इस दलील को सही नहीं माना था और बीती 26 अप्रैल को उन्हें अदालत की अवमानना का दोषी ठहराया था। गिलानी को लेकर स्पीकर के फैसले का हवाला देकर चुनौती वाली संवैधानिक याचिकाए पीएमएल-एन, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई), वकील अजहर चौधरी और कुछ अन्य लोगों की ओर से दायर की गई थी। इस बीच पीपीपी की एक बैठक में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को मान लिया गया है और खबरों के मुताबिक शहाबुद्दीन और अहमद मुख्तार प्रधानमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे हैं।

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