श्वेत क्रांति के जनक का निधन

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Dr varhese-kurien
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कभी दूध की कमी से जूझ रहे भारत को दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक राष्ट्र बनाने वाले श्वेत क्रांति के जनक डॉ. वर्गीज कुरियन का शनिवार देर रात यहां निधन हो गया. किडनी की समस्या से पीडि़त 91 वर्षीय कुरियन को उपचार के लिए हाल में नाडियाड के मुल्जीभाई पटेल यूरोलॉजिकल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था. कुरियन के परिवार में पत्नी मॉली और बेटी निर्मला हैं. राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उनके निधन पर शोक जताया है.

कुरियन ने बीती सदी के सातवें दशक में श्वेत क्रांति की आधारशिला रखी थी. उन्होंने सामान्य दुग्ध उत्पादकों को सहकारिता के हथियार से देश के आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभाने का मौका दिया. उनका मानना था कि किसानों के हाथ में प्रौद्योगिकी और व्यावसायिक प्रबंधन देने से लाखों गरीब ग्रामीणों का जीवनस्तर सुधारा जा सकता है. कुरियन का जन्म केरल के कोझिकोड में 26 नवंबर, 1921 को हुआ था. उन्होंने लोयोला कॉलेज से 1940 में स्नातक करने के बाद चेन्नई स्थित गिंडी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की. कुछ समय टिस्को में काम करने के बाद कुरियन को भारत सरकार की तरफ से अध्ययन के लिए छात्रवृत्ति मिली. इसके बाद कुरियन ने बेंगलूर और अमेरिका में पढ़ाई की.
अमेरिका में पढ़ाई के दौरान कुरियन का मुख्य विषय मैकेनिकल इंजीनियरिंग था, जिसमें एक पेपर डेयरी इंजीनियरिंग का भी था. बाद में उन्होंने इसी को अपना कार्यक्षेत्र बना लिया. अमेरिका से लौटने के बाद सरकारी शर्तों के अनुसार उन्हें गुजरात स्थित सरकारी डेयरी में पदस्थापित किया गया. सरकारी बांड से मुक्ति के बाद कुरियन तत्कालीन डेयरी अध्यक्ष त्रिभुवनदास पटेल के आग्रह पर कैरा जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संगठन को मदद देने लगे. यह डेयरी सरदार बल्लभ भाई पटेल के प्रयासों से शुरू की गई थी. बाद में सरदार पटेल की सलाह पर ही उन्होंने डेयरी प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित किया, जिसे ‘अमूलÓ की शुरुआत माना जाता है.
कुरियन ने गुजरात में वर्ष 1946 में दो गांवों को सदस्य बनाकर डेयरी सहकारिता संघ की स्थापना की. वर्तमान में इसके सदस्यों की संख्या 16,100 पहुंच गई है, जिससे 32 लाख दुग्ध उत्पादक जुड़े हैं. कुरियन दुनिया के पहले व्यक्ति थे, जिन्होंने भैंस के दूध से पाउडर तैयार किया. इससे पहले दुनिया भर में पाउडर बनाने के लिए गाय के दूध का इस्तेमाल किया जाता था.
अमूल की सफलता से उत्साहित तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) की स्थापना कर कुरियन को इसका अध्यक्ष बना दिया. वर्ष 1965 के बाद के 33 वर्षों में उनके बनाए सहकारिता पर आधारित अमूल मॉडल का अनुकरण पूरे देश में किया गया. कुरियन 1965-1998 तक एनडीडीबी के संस्थापक प्रमुख, 1973 से 2006 तक गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड (जीसीएमएमफ) के प्रमुख और 1979 से 2006 तक इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल मैनेजमेंट के अध्यक्ष रहे. भारत सरकार ने उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया. समुदाय नेतृत्व के लिए उन्हें प्रतिष्ठित मैग्सेसे पुरस्कार और कारनेज-वटलर वल्र्ड पीस प्राइज से भी नवाजा गया.

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