बीती बात याद दिलाते हैं सपने

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हमारे पूर्वाग्रह दुराग्रह हमारी इच्छाएं ही हमें सपनों के रूप में दिखाई देते हैं

dreamsबुरे व डरावने सपने एक बीमारी से ज्यादा कुछ नहीं

सपने तो हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। लेकिन क्या सपनों का कोई अस्तित्व होता है। इसमें कोई शक नहीं कि नींद की अपनी दुनिया  है और उसका काफी हिस्सा सपनों से मिल कर बनता है। मस्तिष्क की विद्युत तरंगों के अध्ययन के फलस्वरूप आज हम जान सके हैं कि इंसान ही नहीं, पशु पक्षी भी सपने देखते हैं। सपनों पर अगर गौर करें तो पाएंगे कि अधिकतर सपने हमारी आसपास की घटनाओं पर ही केंद्रित होते हैं। सपने कोई भविष्यवाणी नहीं करते यह हमें हमारी ही पुरानी बातें याद दिलाते हैं। सपनों में हमारे पूर्वाग्रह हमारी कमजोरी, हमारी दबी कुचली इच्छाएं या फिर लक्ष्य  ही तो दिखाई देता है। ऐसे सपनों के करीब हम पहले से ही पहुंच चुके होते हैं या फिर वे हमारे संज्ञान में होते हैं।
कानपुर के मनोचिकित्सक डॉ. उन्नति कुमार कहते हैं कि सपने नींद में ही देखे जा सकते हैं, जागृत अवस्था में नहीं। जागृत अवस्था में हम मात्र कल्पना कर सकते हैं, इसे भ्रमवश दिवा-स्वप्न का नाम दे दिया गया है। सपनों का कोई अस्तित्व नहीं होता। अनिद्रा के दौरान हम ऐसे कई सपने देखते हैं जो अर्थहीन होते हैं। जैसे किसी को बॉस ने डाट लगा दी और वह इनसान परेशान हो गया। उसने मन ही मन सोच लिया कि उसकी तो नौकरी गई। वह वयक्ति  रात में नौकरी से निकाले जाने का सपना देख सकता है। यानी जो हमारे चेतन या अवचेतन मन में होता है वही सबकुछ सपने में दिखाई देता है। किसी बच्चे को भूत प्रेत की कहानी सुनाओ तो वह बच्चा रात में सपने के दौरान कुछ डरावनी आकृति देख सकता है। परीक्षा के दौरान परीक्षा हाल या प्रश्रपत्र का सपने में आना कोई आश्चर्य की बात नहीं है। हममें से बहुत लोग कार या बाइक चोरी होने का सपना देखते हैं। ऐसा इसलिए कि हम अकसर कार या बाइक चोरी होने की खबर से दो चार होते रहते हैं।
सपने अक्सर कहानी के रूप में होते हैं। इनमें पात्र भी होते हैं, चित्र भी होते हैं तथा हमारे अचेतन मन में जो भी रहता है वह सपनों में दिखता है। सपनों को हम सामन्यतया नियंत्रित नहीं कर सकते।

डॉ. उन्नति कुमार तो यहां तक कहते हैं कि हम सपने क्रिएट भी करते हैं। धतूरा की अगर थोड़ी मात्रा ली जाए तो इससे डरावने सपने आने की संभावना रहती है। कुछ मादक पदार्थ अंौर दवाओं के सेवन से भी सपने आने लगते हैं। ऐसे सपनों में आसमान में उडऩा या अचानक कोई मनचाही वस्तु का मिल जाना दिखाई देता है। यह सपने अस्तित्वविहीन होते हैं।

श्री कुमार के अनुसार सपने दो तरह के होते हैं। वह सपने जो हम कच्ची नींद या नींद के श्ुारूआती दौर में देखते हैं वह अकसर रात को हम को चौंका देते हैं या डरा देते हैं। ऐसे सपने जो हमें बाद में भी याद रहते हैं वह हम नींद की रोलिंग आई मूवमेंट यानी आरईएम वाली अवस्था में देखते हैं।

हम सोने के लगभग 70 से 90 मिनट के बाद हम रोलिंग आई मूवमेंट यानी आरइएम-की अवस्था में पहुंचते हैं। इस अवस्था में सांस लेने की गति अनियमित परंतु तेज हो जाती है, आंख की पुतलियां झटके के साथ तेज़ गति से विभिन्न दिशाओं में घूमने लगती हैं तथा हाथ-पैर अस्थाई रूप से शिथिल पड़ जाते हैं। साथ ही हृदय की धडक़न तथा रक्त-चाप बढ़ जाता है।  यदि इस अवस्था में व्यक्ति जाग जाये तो उसे सपने याद रहते हैं। डॉ उन्नति कुमार कहते हैं कि इस अवस्था में सपने अच्छे भी होते हैं और डरावने भी। इस प्रकार के सपने अनिद्रा जैसी बीमारियों के कारण आते हैं।

आरईएम सहित नींद का पहला चक्र 90 से 110 मिनट का होता है। पहले चक्र में आरईएम का समय थोड़ा कम होता है परंतु जैसे-जैसे रात बीतती है, हर चक्र में गहन निद्रा का समय कम होता जाता है और आरईएम का समय बढ़ता जाता है।

डॉ. उन्नति कुमार के अनुसार गहरी नींद के सपने हमें याद नहीं रहते। गहरी नींद यानी कि नॉन रोलिंग आई मूवमेंट एनआरईएम में नींद में जो कुछ भी हुआ वह जागने पर बिल्कुल भी याद नहीं रहता।  नींद की यह अवस्था अच्छे स्वास्थ्य की पहचान है।

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