न नारे, ना मशाल, जोश बेमिसाल

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अन्ना का अनशन टूटा लेकिन आंदोलन जारी है। आंदोलन के नफा नुकसान के अंकगणित में उलझे हैं दिग्गज। नेताओं और राजनीति को कोसने में ही लोग भूल गये हैं कि आज की राजनीति उतनी गंदी नहीं हैं जितना कि दिखाया जा रहा है|

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जयपुर से लगभग 60 किलोमीटर दूर सोदा गांव की सरपंच छवि राजावत ने अपने गांव के लिए वो कर दिखाया है जो युवाओं और दूसरे जनप्रतिनिधियों के लिए एक मिसाल है।

रामलीला मैदान में नेताओं को गरियाते ओमपुरी एक नौटंकी कलाकार से ज्यादा कुछ नहीं लगे। किरन बेदी सरकार से अपनी पुरानी खुन्नस निकालती दिखीं। लेकिन उन युवाओं की ओर देखिये कि उनके हाथों में न तो जलती मशाल है और नहीं जबान पर भड़कीले नारे। जोश और कुछ कर गुजरने की तमन्ना उनके दिल में मशाल की तरह जल रही है। वे चुपचाप लगे हैं अपने मिशन पर। राजनीति और समाजसेवा उनका लक्ष्य है। अपनी जड़ों और जमीन से जुड़े युवा आने वाले समय में भारतीय राजनीति की दशा और दिशा बदलने की ठान चुके हैं। जयपुर के करीब सोदा गांव की सरपंच छवि राजावत जैसे लोग राजनीति में एक मिसाल हैं जो अपनी हाई प्रोफाइल जिंदगी की बजाय अपने गांव, अपनी मिट्टी से जुड़ने में गर्व महसूस करती हैं। और भी कई युवा हैं जो हाई प्रोफाइल हैं, अच्छे अच्छे पदों पर हैं और शानदार जिंदगी गुजारने वाले सारे साधन जुटाने में सक्षम हैं।

छवि ने बदली राजनीति

राजस्थान… जहां बेटियां समाज का हिस्सा बनने से पहले एक किस्सा बन कर रह जाती हैं, वहीं से आया है ताजी हवा का एक झोंका। जयपुर से लगभग 60 किलोमीटर दूर सोदा गांव की सरपंच छवि राजावत ने अपने गांव के लिए वो कर दिखाया है जो युवाओं और दूसरे जनप्रतिनिधियों के लिए एक मिसाल है। संयुक्त राष्ट्र ने भी भारत की इस युवा और उच्च शिक्षा प्राप्त सरपंच के हौसले को सलाम किया। राजस्थान, जहां लड़कियों का पैदा होना एक अभिशाप माना जाता है, वहीं की छवि ने इस मिथक को तोड़ दिया है। सोदा गांव की सरपंच छवि राजावत मीडिया की सुर्खियां तब बनीं जब 24 और 25 मार्च 2011 को संयुक्त राष्ट्र के 11वें इन्फो पॉवर्टी वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस में उनको आमंत्रित किया गया। संयुक्त राष्ट्र की उस बहस में शामिल अन्य देशों के लोग छवि राजावत को देखकर चौंके और जब छवि ने बोलना शुरू किया तो हॉल में पहले सन्नाटा पसरा और अचनक तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी। छवि ने गांव के विकास का जो मॉडल पेश किया उसकों सबने सराहा। विश्व मंच पर जाने से पहले वह बिना किसी शोर शराबे के अपने गांव को आत्म निर्भर बनाने में जुटी थी।

भारत की सबसे ज्यादा पढ़ी लिखी इस सरपंच ने राजनीति की नयी परिभाषा गढ़ी है। अपनी मैनेजमेंट की पढ़ाई और एक बेहतरीन कॅरियर जो किसी भी युवा का सपना होती है उसे छोड़ अपनी माटी अपने गांव को संवारने का बीड़ा उठाया। वो भी उस दौर में जब युवा बाहर पढ़ाई करने के बाद अपने शहर के घर लौटना या नौकरी करना तो दूर कुछ दिन रुकना तक पसंद नहीं करते गांव के बारे में सोचना तो बहुत दूर की बात है। बुलंद हौसले वाली छवि तीन साल में अपन गांव को आत्म निर्भर बनाने में लगी है। अभी बैंक खुलवाया है।

सिर्फ गाली देने से नहीं चलेगा काम

कानपुर आईआईटी के छात्र रहे ओमेन्द्र भारत कहते हैं कि पिछले चुनाव में उन्हें लोगों का काफी समर्थन मिला था। हम सिर्फ और सिर्फ इस दावे के साथ राजनीति में आना चाहते हैं कि हम सिस्टम बदलेंगे। सिर्फ सरकार को कोसने से काम नहीं चलेगा। नेताओं को गाली देने से कुछ नहीं होने वाला। संसद और विधानसभाओं में पहुंचकर ही जनता के लिए कुछ किया जा सकता है। अब दूर से बैठ कर तमाशा देखने से कुछ नहीं होने वाला। सकारात्मक सोच के साथ अच्छे लोगों को राजनीति से जोड़ना और उन्हें सक्रिय भागीदार बनाना हमारा लक्ष्य है। इसी उद्देशय को लेकर भारत पुननिर्माण दल के स्थान पर जनराज्य पार्टी बनाई है। यह पार्टी चुनाव आयोग से अनुरोध कर रही है कि वोटिंग प्रतिशत बढ़ाने के और प्रयास किये जायें। दस प्रतिशत वोट पाने वाला कब तक 90 प्रतिशत पर जबरन राज्य करेगा।

तो नौकरी व घर-बार तक छोड़ देंगे

धनबाद स्कूल ऑफ माइन्स के कई छात्रों ने माई शौर्य नाम का एक समूह बनाया है। अभी इस समूह ने मान्यता के लिए चुनाव आयोग में आवेदन नहीं किया है। यहाँ के छात्र और इस समूह के संस्थापक सदस्य अंशू जैन बताते हैं कि हम लोगों का यह समूह हर हाल में राजनीति में उतरेगा और सक्रिय भागीदारी करेगा। 2009 में शुरू हुआ समूह अभी अपनी विचारधारा बनाने का प्रयास कर रहा है। हमारे समूह के कई सदस्य वेल सैटेल्ड हैं। कुछ इंडिया में हैं तो कुछ बाहर हैं। सबने शपथ ली है कि वे घर-बार नौकरी छोड़कर जल्द ही सक्रिय राजनीति में उतरेंगे और संसद व विधानसभाओं में खासी दखल देंगे। माई शौर्य समूह के साथ दिल्ली आईआईटी और कानपुर आईआईटी के कई छात्र हैं। कुछ छात्र भारतीय प्रबंध संस्थान के भी हैं।

माई शौर्य के सदस्य बादल सिंह जो कि इस समय कर्नाटक के मंगलौर की आईटी कम्पनी में साफ्टवेयर इंजीनियर हैं, बताते हैं कि इस समूह में देश के कोने कोने से छात्र संगठन जुड़ने को तैयार हैं।

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सिर्फ समाजसेवा से नहीं चलेगा काम

राजनीति को कभी भी गंदा नहीं मानते लिबरल यूथ फोरम के कोआर्डीनेटर राजन सिंह। राजन कहते हैं कि उनका फोरम ज्यादा से ज्यादा युवाओं को राजनीति में उतरने का प्रबल समर्थक रहा है। रांची से संचालित इस फोरम में देश के कई हिस्सों के छात्र जुड़े हैं। लिबरल यूथ फोरम ने हाल ही में बिहार विधान सभा चुनावों में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया था। नोएडा में विप्रो में प्रोजेक्ट इंजीनियर ध्रुव ठाकुर जो कि राष्ट्रीय पार्टी के संस्थापक भी हैं बताते हैं कि अब सिर्फ समाजसेवा से काम नहीं चलने वाला। हम और हमारा संगठन युवाओं को राजनीति में आने के लिए प्रेरित करेगा। उनकी विचार धारा को हम सकारात्मक तरीके से राजनीति की ओर मोड़ेंगे। राजनीति में गंदगी का साफ करने का जिम्मा एनजीओ को तो नहीं सौंपा जा सकता।

अब ज्यादा जरूरी है राजनीति में आना

राजनीति में युवाओं या छात्रों का आना अब पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है। पहले की छात्र राजनीति का कोई मुकाबला नहीं। आने वाले दिनों में अगर हम आगे नहीं आये तो राजनीति का स्तर नहीं सुधरेगा। ये कहना है यूथ डेमोक्रेटिक फ्रंट के संस्थापक सदस्य योगेश गोपाल का। हैदराबाद से संचालित यूथ डेमोक्रेटिक फ्रंट का मानना है कि राजनीति में करप्शन है। हम करप्शन के खिलाफ लड़ेंगे। अरे भाई कैसे लड़ेंगे? चुनाव लड़ना तो दूर चुनाव के समय आप वोट डालने जाओगे नहीं। बिना राजनीति में आये राजनीति को कोसना अब बंद होना चाहिए। 2009 में अस्तित्व में आई यह पार्टी उत्तर प्रदेश में चुनाव को लेकर काफी गंभीर हैं। पेशे से इलेकिट्रकल इंजीनियर योगेश बताते हैं कि अब तो जनसम्पर्क के कई साधन हैं। फेसबुक मेल और पोर्टल से हम अपनी बात रख तो सकते हैं। फेसबुक के सहारे भी यूथ डेमोक्रेटिक फ्रंट से जुड़ा जा सकता है। इस फ्रंट के अध्यक्ष कोंडावीति वेकेंट शिवनाग और महासचिव सुयश राय हैं। कोलकाता व चेन्नई में भी यह फ्रंट सक्रिय है।

जब सदन में मजबूत होंगे तभी हमारी सुनी जायेगी

युवाओं को नौकरी में बिना भेदभाव यानी आरक्षण का विरोध करने वाली और संसद में छात्रों की भागीदारी करने वाली जागो पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष दीपक मित्तल बताते हैं कि युवाओं के लिए राजनीति में अच्छा स्कोप है। जागो पार्टी देश के कोने कोने से युवाओं को इसके लिए जागरूक कर रही है। वर्ष 2008 में अस्तित्व में आई इस पार्टी ने राजस्थान विधान सभा में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। वर्ष 2009 लोकसभा चुनाव में जागो पार्टी ने बिहार व मुम्बई में कई सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़े किए थे। राजस्थान को लक्ष्य मान कर चल रही जागो पार्टी की देश भार में शाखाएं हैं। दीपक मित्तल कहते हैं कि भ्रष्टाचार के खिलाफ हर आंदोलन में पार्टी भाग ले रही है। जब हम सदन में मजबूत होंगी यानी युवा और छात्र अपनी बात रख सकेंगे और यकीनन हमारी बात सुनी जायेगी। तब जरूर से जरूर भारतीय राजनीति का चेहरा बदलेगा।

नौकरी को मूल अधिकार माना जाये

स्वराज्य पार्टी के अध्यक्ष अनुपम मिश्र जो कि लखनऊ में युवाओं को प्रशासनिक सेवाओं की परीक्षा की तैयारी करवाते थे, अब पूरी तरह से राजनीति को समर्पित हो गये हैं। वर्ष 2009 में स्वराज पार्टी ने प्रदेश में कई उम्मीदवार खड़े किये थे। अनुपम स्वयं लखनऊ से चुनाव लड़े थे। अनुपम कहते हैं कि अब हमें स्वयं निर्णय लेना है कि राजनीति में सक्रिय भागीदारी का। नौकरी या प्रमोशन में आरक्षण की प्रथा खत्म हो क्योंकि यह युवाओं को कुंठित कर देती है।

विभिन्न राज्यों में होने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनाव में भारतीय राजनीति का अलग चेहरा देखने को मिलेगा। भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग के साथ युवाओं के मुद्दे भी जोरदार ढंग से उठेंगे।

चुनाव लड़ने वाले युवाओं का हर हाल में देंगे साथ

भारत उदय मिशन भी भारतीय राजनीति में बदलाव को आतुर है। इस संगठन महाराष्टÑ और दिल्ली में पिछले लोकभा चुनावों में अपना प्रभाव छोड़ा है। मुम्बई में इसका मुख्यालय है। चुनाव आयोग द्वारा मान्यता प्राप्त इस संगठन की संस्थापक सदस्य और प्रेसीडेंट डॉ. अकल्पिता परांजपे बताती हैं कि अगर राजनीति को गंदी मान कर लोग उससे दूर भागते रहेंगे तो फिर बुरे और भ्रष्ट लोगों को मौका मिलता रहेगा और वे सरकार को अस्थिर कर जनता का जमकर शोषण करेंगे। भारत उदय मिशन की इस देश के 60 शहरों में सक्रिय है। वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में भारत उदय मिशन ने पटना मुम्बई और दिल्ली में अपने प्रत्याशी खड़े किए थे। अब मुम्बई नगर निगम चुनाव पर संगठन की नजर है। यूपी में 2012 में होने वाले चुनाव में संगठन की नजर रहेगी|

–सुरेश चन्द्र श्रीवास्तव

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