प्रणब पर राजग राजी, उपराष्टपति के लिए जसवंत पर लगाएंगे बाजी

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राजग में प्रणब के लिए सहमति के सुर लेकिन उपराष्टपति पद पर होगी सौदेबाजी

प्रणब मुखर्जी के लिए रायसीना हिल्स का दरवाजा करीब आता जा रहा है, क्योंकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के भी कुछ खेमे में उनके पक्ष में सहमति बनती दिख रही है। कांग्रेस ने शनिवार को कहा कि राष्ट्रपति पद के लिए मतदान होने की स्थिति में प्रणव मुखर्जी आसानी से जीत जाएंगे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री पवन कुमार बंसल ने संवाददाताओं से कहा कि सपा, बसपा सहित अन्य दलों से समर्थन प्राप्त करने के बाद हमें प्रणबजी के लिए अन्य से और समर्थन मिलने की उम्मीद है। हम केवल अपील कर सकते हैं। हम आशा करते हैं कि वह (ममता बनर्जी) भी अब अपना समर्थन दे देंगी। प्रणव ने भी ममता से यह कहते हुए समर्थन की अपील की है कि वह उनकी बहन जैसी हैं।मतदान होने की स्थिति में प्रणव आसानी से जीत जाएंगे। उन्होंने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है लेकिन अभी हम यह पक्के तौर पर नहीं कह सकते कि मतदान होगा। ममता बनर्जी की ओर से गठबंधन सहयोगी को नजरअंदाज करके पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम को सार्वजनिक रूप से अपनी पसंद बताए जाने के बारे में पूछे जाने पर बंसल ने कहा कि उम्मीदवार की घोषणा से पहले वह अपना विचार व्यक्त करने की हकदार थीं। मुखर्जी की उम्मीदवारी घोषित होने के बाद हम उनसे उन्हें समर्थन करने का अनुरोध करेंगे। हो सकता है कि वह (प्रणव को समर्थन करने को लेकर) पुनर्विचार करें।
यद्यपि भाजपा नेतृत्व वाले राजग को अभी मुखर्जी का समर्थन करने के लिए मन बनाना बाकी है, लेकिन राजग के प्रमुख घटक जनता दल (युनाइटेड) और कुछ हदतक शिरोमणि अकाली दल के खेमे से उनके समर्थन में सुर निकले हैं। इसके साथ ही राजग में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि अगर कांग्रेस जसवंत को उपराष्टï्रपति बनाने पर राजी हो सकती है तो प्रणब पर राजग को को कोई ऐतराज नहीं है। पटना में जद (यू) के नेता शिवानंद तिवारी ने संवाददाताओं के साथ बातचीत में मुखर्जी का समर्थन किया और कहा कि उन्हें देश का 13वां राष्ट्रपति बनाकर एक शानदार विदाई दी जानी चाहिए। तिवारी ने कहा, प्रणब मुखर्जी जैसे वरिष्ठ और सम्मानित नेता, जो सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने जा रहे हैं, को सम्मानजनक विदाई देनी चाहिए। हालांकि उन्होंने कहा कि यह उनकी निजी राय है। तिवारी ने यह भी कहा कि मुखर्जी को समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का समर्थन है, और ऐसे में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) का चुनावी आकड़ा 47.6 प्रतिशत हो जाएगा।
न्यूजनेटवर्क 24 ने पहले ही ऐलान कर दिया था कि ममता या मुलायम कुछ भी कर लें कांग्रेस प्रणब को ही राष्टरपति का उम्मीदवार बनाकर ही रहेगी। पीएम निवास पर आयोजित शुक्रवार को यूपीए की बैठक में प्रणब को यूपीए का उम्मीदवार बनाने पर फैसला हो गया है। इसकी अधिकारिक घोषणा यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने की।। बैठक में मोजूद यूपीए के सभी घटक दलों ने एक सुर में प्रणब के नाम का समर्थन किया। सूत्रों के मुताबिक प्रणब मुखर्जी 24 जून को वित्तमंत्री के पद से इस्तीफा देकर 25 को नामांकन दाखिल करेंगे। देश के 13 वे राष्टï्रपति के रूप में प्रणब मुखर्जी का शपथ लेना तय माना जा रहा है।  कलाम के मुकाबले प्रणब मुखर्जी की स्थिति मजबूत है। सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने प्रणब मुखर्जी के नाम पर सहमति जता दी है। बसपा ने कांग्रेस प्रत्याशी प्रणब मुखर्जी को अपना समर्थन पीएम निवास पर आयोजित यूपीए की बैठक में प्रणब को यूपीए का उम्मीदवार बनाने पर फैसला हो गया है। इसकी अधिकारिक घोषणा यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने की।। बैठक में मोजूद यूपीए के सभी घटक दलों ने एक सुर में प्रणब के नाम का समर्थन किया।
उधर, पूर्व राष्ट्रपति कलाम ने इस मुद्दे पर देखो और इंतजार करो का रुख अख्तियार करने का निर्णय किया है। सपा सूत्रों ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने उनका नाम लेने से पहले उन्हें विश्वास में लिया था। लेकिन कलाम के करीबी सूत्र के अनुसार उनका मानना है कि वह तभी मैदान में आएंगे जब उनके नाम पर आम सहमति हो।इस बीच ये भी संकेत हैं कि संप्रग के सहयोगी दल कल गठबंधन के एक उम्मीदवार का नाम तय करने के लिए एक साथ बैठेंगे। तृणमूल अध्यक्ष ममता बनर्जी ने इसमें भाग नहीं लेने का फैसला किया है। राष्ट्रपति चुनाव की कवायद में कांग्रेस और ममता बनर्जी के बीच गतिरोध खुलकर सामने आ गया है। कांग्रेस ने जहां ममता पर कल सोनिया से बातचीत के बाद प्रणव और उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के नामों का खुलासा करके मर्यादा तोड़ने का आरोप लगाया। वहीं, तृणमूल ने कहा कि उन्होंने कोई विश्वासघात नहीं किया।बढ़ते गतिरोध के बीच ममता ने कहा कि वह अपनी ओर से संप्रग सरकार को अस्थिर नहीं करना चाहतीं लेकिन दबाव में नहीं आएंगी। उन्होंने कहा कि वह संप्रग का साथ नहीं छोड़ेंगी लेकिन गेंद कांग्रेस के पाले में है। राजनीतिक गहमागहमी वाले आज के दिन की शुरुआत कांग्रेस पार्टी की ओर से आये कठोर बयान से हुई जिसमें ममता बनर्जी पर निशाना साधा गया। कांग्रेस ने तृणमूल-सपा के सुझाये तीनों नामों को खारिज कर दिया। इनमें प्रधानमंत्री के साथ पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी हैं।

 

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