अमिताभ बच्चन का इकलौता मंदिर जहां होती इनकी पूजा

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amitabh-bachchan-temple11 अक्टूबर को अमिताभ बच्चन का 74वां जन्मदिन है। 74 सालों में उनकी जिंदगी  के हर पहलू के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है। वह एकबार 1962  में नौकरी के लिए  कोलकाता आये हुये थे। उसके 7  साल बाद वे 1969  में मुंबई पहली फिल्म करने आये। आज हम आपको दुनिया के  इकलौते अमिताभ मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जो कोलकाता में है।
कोलकाता से ‘दैनिक भास्कर खबर’ के मुताबिक आपने भगवान के मंदिर तो बहुत देखे होंगे। लेकिन आज हम आपको अमिताभ बच्चन का मंदिर दिखाने जा रहे हैं। ये दुनिया में बिग बी का इकलौता मंदिर बताया जा रहा है। इस मंदिर में रोज 6 मिनट की फिल्मी आरती गाकर बिग बी और उनके जूतों की पूजा होती है। आरती से पहले 9 पन्ने की खास अमिताभ चालीसा भी पढ़ी जाती है। इन सबके बाद वहां बैठे सभी भक्तों को प्रसाद भी मिलता है। हम आपको बता रहे हैं दुनिया के इकलौते अमिताभ बच्चन मंदिर के बारे में।
अमिताभ की जूतों की होती है पूजा
इस मंदिर में अमिताभ बच्च्न की तस्वीर के साथ अग्निपथ मूवी में पहने गए उनके सफेद जूते की भी पूजा होती है। इतना ही नही उनकी फिल्म ‘अक्स’ में जिस कुर्सी पर वो बैठे थे, उस कुर्सी को भी इस मंदिर में रखा गया है।
इस कुर्सी पर अमिताभ की फोटो रखकर रोज पूजा-आरती होती है। बता दें आपको इस मंदिर स्थान कोलकाता के श्रीधर राय रोड़ पर है। और यहां देश-विदेश से दर्शन करने आते हैं।
भगवान की तरह है ‘अमिताभ चालीसा’ और आरती भी
यहां इस मंदिर में पूजा और आरती उसी प्रकार होती है, जैसे सभी मंदिरों में होती है। हनुमान चालीसा और दूर्गा चालीसा की तरह 9 पन्ने की अमिताभ चालीसा और आरती गीत भी होती है। ‘अमिताभ नम:’ के नाम से संकट मिटाने वाला मंत्र भी तैयार किया है।
अमिताभ तीर्थ यात्रा
बिग बी के फैन्स साल में 2 बार इस मंदिर से अमिताभ तीर्थ यात्रा निकालते हैं। पहली तीर्थ यात्रा अमिताभ के बर्थडे 11 अक्टूबर को दूसरी यात्रा 2 अगस्त को। तीर्थ यात्रा इस मंदिर से अमिताभ के मुंबई वाले घर तक जाती है।
दीया मिर्जा ने भी किया दर्शन
2014 में दीया मिर्जा एक फिल्म के लिए कोलकाता आईं थीं। तब उन्होंने अमिताभ बच्चन के इस मंदिर में दर्शन की थी। इस दौरान उन्होंने पूजा-आरती भी की थी।
इंसान ही ठीक भगवान मत बनाओ
महानायक अमीताभ बच्चन को इस मंदिर के बारे में पता चला तो उनकी आंखों में आंसू आ गए। और उन्होंने संजय पटौदिया को चिट्ठी लिखते हुए कहा कि मुझे इंसान ही रहने दो, भगवान का दर्जा मत दो।

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