लीक हुए दस्तावेजों को ट्रंप ने बताया बेबुनियाद, कहां- हैकिंग के पीछे रूस का हाथ

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अमेरिका के 45वें राष्ट्रपति चुने जाने के बाद शपथ ग्रहण से मात्र कुछ दिन पहले डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी पहली ही प्रेस कांफ्रेंस में अपनी ही खुफिया एजेंसियों को कटघरे में खड़ा कर दिया है. दरअसल हाल ही में कुछ ऐसे दस्तावेज़ लीक हुए थे, जिनमें ये कहा गया कि रूसी अधिकारियों के पास ट्रंप की कुछ ऐसी वीडियो रिकॉर्डिंग्स मौजूद हैं, जो बेहद आपत्तिजनक हैं. लेकिन ट्रंप ने लीक हुए उन दस्तावेज़ों को बेबुनियाद और झूठा बताया है और कहा है कि इसके लिए अमेरिकी खुफिया एजेंसियां ज़िम्मेदार हैं. इसके साथ ही ट्रंप ने कहा कि अगर खुफिया एजेंसियों ने ऐसा किया है तो उनके रिकॉर्ड पर यह बड़ा धब्बा होगा

सम्मेलन में उन्होंने कहा, जहां तक हैकिंग का सवाल है, मुझे लगता है यह रूस का काम है, लेकिन मुझे ऐसा लगता है कि कुछ अन्य देशों ने भी हैकिंग की है. ट्रंप ने कहा, डीएनसी हैकिंग के लिए पूरी तरह खुला हुआ था. उन्होंने बहुत ही खराब तरीके से काम किया. हाल ही में 2 करोड़ 20 लाख लोगों के नाम और जानकारियां हम खो चुके हैं, इसके पीछे संभवत: चीन भी हो सकता है.” उन्होंने कहा कि रिपब्लिकन नेशनल कमेटी को हैक करने के प्रयास विफल रहे और उन्हें सफलता नहीं मिली.

डोनाल्ड ट्रंप की प्रेस कांफ्रेंस में शुरुआत ही रूस के कथित हैकिंग वाले सवालों से हुई. मीडिया के सवालों पर उन्होंने पहली बार ये बातें कही कि राष्ट्रपति चुनाव के दौरान की गयी हैकिंग रूस की ओर से हो सकती है लेकिन निश्चित तौर पर यह नहीं कहा जा सकता, क्योंकि चीन सहित कई देश अमेरिकी साइबर स्पेस में लगातार सेंध मारते रहते हैं.

अमेरिका के निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, ”मैं फिर से कहूंगा ये बेहद शर्मनाक है कि जानकारी लीक हुई, मैंने वो जानकारी देखी है, वो सब झूठी खबरें हैं, ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है, हमारे विरोधियों की चाल है, सारे विरोधियों ने एक होकर ये बेबुनियाद जानकारी दी है.”

उधर रूस ने भी ऐसी खबरों का खंडन करते हुए कहा है कि ये अमेरिका और रूस के रिश्तों को खराब करने की साज़िश है, चुनाव प्रचार के वक्त से ही ट्रंप रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की तारीफ करते रहे हैं, प्रेस कांफ्रेंस में भी उन्होंने कहा कि पुतिन की दोस्ती को वो एक संपत्ति की तरह देखते हैं.

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