खुशखबरी!! किसानों और छोटे कारोबारियों को मिली पंजीकरण से छूट

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जीएसटी के लागू होने के बाद छोटे होटल, रेस्तरां और ढाबों में खाना सस्ता हो सकता है। टैक्स में दो-तिहाई तक बचत हो सकती है। दरअसल, जीएसटी काउंसिल ने 50 लाख रुपए तक सालाना टर्नओवर वाले छोटे होटलों, रेस्तरां और ढाबों के लिए जीएसटी की दर 5% तय करने को मंजूरी दे दी है। अगर आप ऐसे किसी होटल, रेस्तरां, ढाबे में खाना खाते हैं तो आपको मौजूदा सर्विस टैक्स के मुकाबले महज एक तिहाई ही जीएसटी देना होगा। फिलहाल सर्विस टैक्स की दर 15% है। यह रेस्तरां के बिल राशि के 40% पर लगता है।

काउंसिल ने लगाई मसौदे मंजूरी
खबरों के मुताबिक, शनिवार को फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली की अगुआई में जीएसटी काउंसिल की 11वीं मीटिंग हुई। जिसमें नए इनडायरेक्ट टैक्स सिस्टम के लिए प्रपोज्ड दो अहम बिलों- सेंट्रल जीएसटी (सीजीएसटी) और इंटीग्रेटेड जीएसटी (आईजीएसटी) के आखिरी मसौदे को मंजूरी दी गई। जेटली ने राज्यों के फाइनेंस मिनिस्टर्स से भी मुलाकात की। पश्चिम बंगाल के फाइनेंस मिनिस्टर अमित मित्रा ने बताया, राज्यों ने 26 बदलाव की मांग की थी जिसे केंद्र सरकार ने एक्सेप्ट कर लिया है। केंद्र और राज्य सरकारें ढाबा और छोटे रेस्तरां कारोबारियों के लिए एक सेटलमेंट प्लान पर रजामंद हुए हैं। राज्य यह मांग कर रहे थे कि ढाबा और छोटे रेस्तरां सेटलमेंट प्लान अपना सकते हैं, केंद्र सरकार इस पर रजामंद हो गई है कि इन छोटे कारोबारी पर 5% टैक्स लगेगा और यह केंद्र और राज्यों के बीच बराबर बांटा जाएगा।

1 जुलाई तक लागू हो सकती है जीएसटी
जेटली ने कहा, “स्टेट जीएसटी (एसजीएसटी) बिल के मसौदे को भी मंजूरी जल्द मिलने वाली है। यह बिल स्टेट्स असेंबली की तरफ से अप्रूव्ड किया जाएगा। एसजीएसटी के साथ यूटी-जीएसटी, सीजीएसटी बिल की तर्ज पर होगा और जीएसटी काउंसिल 16 मार्च की मीटिंग में इस पर विचार करेगी।” सीजीएसटी, आईजीएसटी और यूटी-जीएसटी बिल को 9 मार्च से शुरू होने वाले बजट सेशन के दूसरे फेज में संसद में रखा जाएगा। जेटली ने कहा कि जीएसटी लागू करने के लिए 1 जुलाई की टाइम लिमिट पॉसिबल दिख रही है।

जानिए कैसे होगा सस्ता
मान लें, किसी रेस्तरां में आपका बिल 1,000 रुपए बनता है तो सर्विस टैक्स 60 रुपए बनता है। अगर इसी फॉर्मूले के मुताबिक 5% जीएसटी लगा तो आपको 40 रुपए की बचत होगी, क्योंकि जीएसटी की राशि महज 20 रु. ही बनेगी। केंद्र और राज्यों ने किसानों को जीएसटी अरेंजमेंट के तहत रजिस्ट्रेशन से छूट देने का फैसला किया है। वहीं 20 लाख रुपए तक सालाना कारोबार वाले बिजनेसमैन को जीएसटी के लिए रजिस्ट्रेशन नहीं कराना होगा। इसके अलावा जीएसटी काउंसिल ने कमिश्नर लेवल ऑफिसर्स को करदाताओं को टैक्स किस्त में जमा कराने की छूट देने का भी हक दिया है ताकि जीएसटी अदा करने वालों को फाइनेंशियल प्रॉब्लम से निपटने में राहत मिल सके।

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