नहीं रहे विज्ञान को सहज बनाने वाले प्रोफेसर यशपाल

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नोएडा। वैज्ञानिक और शिक्षाविद् प्रोफेसर यशपाल का मंगलवार को नोएडा स्थित उनके घर पर निधन हो गया। वह 90 साल के थे। बता दें, यशपाल को पद्म विभूषण समेत कई सम्मान से सम्मानित किया गया था।
प्रोफेसर यशपाल का जन्म 1926 में हुआ था। यशपाल पंजाब विश्वविद्यालय से 1949 में भौतिकी में स्नातक की डिग्री ली। उन्होंने 1958 में मैसाच्यूसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इसी विषय पर पीएचडी की।

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1973 में सरकार ने उन्हें स्पेस एप्लीकेशन सेंटर का पहला डॉयरेक्टर नियुक्त किया गया। 1983-84 में वह प्लानिंग कमीशन के चीफ कंसल्टेंट भी रहे। 1986 से 1991 तक यूजीसी के चेयरमैन रहे थे। 1993 में बच्चों की शिक्षा में ओबरबर्डन के मुद्दे पर भारत सरकार ने यशपाल की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई। एजुकेशन और साइंस में उनकी विशेष सेवा के लिए भारत सरकार ने उनको 1976 में पद्म भूषण, 1980 में मारकोनी अवॉर्ड, 2009 में कलिंगा अवॉर्ड और 2013 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया था। उन्हें लालबहादुर शास्त्री अवार्ड से भी नवाजा गया था।
प्रोफेसर यशपाल को कॉस्मिक किरणों पर अपने गहरे अध्ययन के लिए भी जाना जाता है। वह दूरदर्शन पर विज्ञान से जुड़े कार्यक्रम ‘टर्निंग प्वाइंट’ के एंकर रहे थे। विज्ञान से जुड़ी मुश्किल बातों को भी आसान भाषा और सहज तरीके से समझाने के चलते वह विज्ञान के छात्रों के बीच भी काफी लोकप्रिय थे। वह भारत की छाप जैसे टीवी के विज्ञान कार्यक्रमों के सलाहकार मंडल में भी शामिल रहे हैं।

 

 

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