नसीमुद्दीन तो बड़ा ब्लैक मेलर है: मायावती

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लखनऊ। बसपा मुखिया मायावती ने नसीमुद्दीन सिद्दीकी पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि नसीमुद्दीन टैपिंग ब्लैक मेलर है। उन्होंने टेप में कांट-छांट का भी आरोप लगाया। साथ ही यह भी कहा कि नसीमुद्दीन को निकाले जाने के बाद मुस्लिम समाज के लोगों ने उन्हें फोन कर बधाई दी है।
मायावती ने कहा कि मान्यवर कांशीराम हमेशा कहते थे कि नसीमुद्दीन ठीक आदमी नहीं है। 19 अप्रैल को मीटिंग बुलाई तो काफी लोग उसके खिलाफ बोले। बताया कि नसीमुद्दीन ने पैसा लेकर कारोबार में लगा दिया। मुझे उनकी ज़मीन जायदाद नहीं चाहिए थी बल्कि गरीबों का हिसाब चाहिए था। मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में नसीमुद्दीन को मुस्लिमों को जोड़ने के लिए लगाया गया था। तमाम लोगों ने इनकी शिकायत की कि अगर नसीमुद्दीन को पार्टी से नहीं हटाया गया तो पार्टी पीछे चली जाएगी। चुनाव नतीजों के बाद जिम्मेदार नेताओं की समीक्षा की, जिसमें मालूम हुआ कि इन्होंने पार्टी के लिए कुछ नहीं किया।

गरीबों की मेम्बरशिप का पैसा भी हजम कर गया
नसीमुद्दीन ने पार्टी फंड के पैसे का दुरुपयोग किया। हमने उनसे चंदे का हिसाब मांगा था, जो उन्होंने नहीं दिया। हमें कई लोगों की ओर से शिकायत मिली, वो पार्टी फंड के पैसे का गलत इस्तेमाल कर रहा है। ऐसे में मजबूरन हमें उन्हें पार्टी से निकालना पड़ा। पार्टी को गरीब मजदूरों से पैसे मिले। उनके पैसे को नसीमुद्दीन खा गए। पश्चिमी यूपी के कई लोगों ने मांग की थी कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी को पार्टी से हटाया जाए।

टेलीफोनिंग की आड में करता है धन अगाही
मायावती ने कहा कि लोगों ने मुझे बताया था कि ये बड़ा ब्लैक मेलर है। पहले लोगों को उकसाता है फिर टेप करता है और उसकी आड़ में ब्लैकमेल करता है। धन उगाही करता है। आज मुझे मालूम हुआ कि ये वाकई टैपिंग ब्लैकमेलर है। मुझे लोगों ने कल बताया कि नसीमुद्दीन अपने आपको प्रदेश में नंबर दो बताते थे। ऑडियो क्लिप पर मायावती ने कहा कि उसने ऑडियो क्लिप से छेड़छाड़ की है। उसने अपने हिस्से की बातों को डिलीट कर दिया और सिर्फ मेरी बातों को ही गलत तरीके से पेश किया। ऑडियो टेप में सिर्फ अपने मतलब की बातें सुनवाई।

जो लड़के को नहीं जिता सका मुझे क्या जितायेगा
नसीमुद्दीन को जहां भी लगाया इसने नुकसान कराया। पार्टी में जब से आए हैं, उनके साथ वही लोग गए हैं जो बिजनेस पार्टनर हैं। उसने बीएसपी की मुहिम को नुकसान पहुंचाया। मुस्लिम समाज को बसपा पर पूरा भरोसा है। मैंने कभी भी आपत्तिजनक बातें मुस्लिम समाज के खिलाफ नहीं कही। मैंने कई बार दूसरे मुस्लिम नेताओं को आगे बढ़ाने की बात कही, लेकिन सिद्दीकी उन लोगों को आगे आने नहीं दे रहे थे। मुस्लिम समाज के लोग उसको कभी माफ नहीं करेंगे।नसीमुद्दीन अपने लड़के को चुनाव नहीं जीता सका वह मुझे क्या बिल्सी से जिताएगा। खुद बांदा चेयरमेन का चुनाव हार गए थे। 1990 में बसपा में आये थे और 1993 में बुरी तरह हार गए तब मैंने इन्हें एमएलसी बनाया। मैंने पहली बार सुना है कि नसीम के कोई लड़की भी थी ।

नेता का फोन टेप करने वाला वफादार कैसे
मायावती ने कहा कि जो अपने नेता का फोन टेप करता हो वह वफादार कैसे हो सकता है। वर्कर को ब्लैकमेल कर सकता है लेकिन मुझे नहीं कर सकता। नसीमुद्दीन को सतीश मिश्रा ने मेरे कहने से निकाला। नसीमुद्दीन इतना बड़ा आदमी नहीं कि इसे मैं पार्टी से निकालूं इसलिए सतीश चन्द्र मिश्रा से निकलवाया। अपनी कमी छुपाने के लिए वह मुझ पर व सतीश पर झूठा आरोप लगा रहा है। वह सतीश चन्द्र मिश्रा का मुक़ाबला किसी कीमत पर नहीं कर सकता। वह उनके पैरों की धूल भी नहीं है। सतीश पूरी ईमानदारी और निष्ठा से मुझे सगी बहन मान कर परिवार समेत मेरे साथ खड़े रहे। उनका पूरा परिवार सम्मानित है।

वोट फीसदी हमारा कम नहीं हुआ
उन्होंने कहा कि मेरे भाई क्या थे, ये बताने का क्या मतलब है। अम्बानी क्या थे…. ये देखो बाद में वो कितने बड़े आदमी बने। क्या कोई आदमी गरीबी से बड़ा कारोबारी नहीं बन सकता।विधानसभा चुनाव में भाजपा को छोड़कर बाकी दलों का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा। बसपा को भी कम सीटें मिली, लेकिन वोट फीसदी हमारा कम नहीं हुआ। यह साबित करता है कि जनता का हम पर यकीन बना हुआ है। उन्होंने कहा कि यूपी चुनाव में हमारी हार की बड़ी वजह ईवीएम में गड़बड़ी है। हमने इसको लेकर अपनी शिकायतें भी दर्ज कराई। यहां तक कि धरना-प्रदर्शन भी किया।

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