कर्ज माफी की मांग कर रहे किसानों पर फायरिंग, 6 की मौत

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मंदसौर । किसानों का आंदोलन दिन पर दिन हिंसक होता जा रहा है। मध्य प्रदेश में कर्ज माफी समेत कई मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे किसान मंगलवार को मंदसौर जिले में हिंसक हो गए। उन्होंने विभिन्न जगहों पर 18 ट्रक फूंक दिए। कई छोटे वाहनों में तोड़फोड़ की। आंसू गैस से भी काबू नहीं हो रहे किसानों पर पुलिस को गोली चलानी पड़ी। इससे छह की मौत हो गई। हालात बेकाबू देख मंदसौर शहर में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगा दिया गया है। अफवाहों को रोकने के लिए जिले में इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है। हिंसा में मारे गए किसानों के परिजनों को राज्य सरकार ने दस-दस लाख रुपये का मुआवजा देने का फैसला किया है।

मुख्यमंत्री शिवराज चौहान ने घटना की न्यायिक जांच के आदेश दिए

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घटना की न्यायिक जांच के आदेश दे दिए हैं। जिले में तीन दिनों से फैल रही अराजकता को हलके में लेना जिला और पुलिस प्रशासन को मंगलवार को भारी पड़ गया। बही चौपाटी पर वाहनों को फूंकते किसानों को काबू करने के लिए जब पुलिस और सीआरपीएफ की टीम पहुंची तो उनपर हमला कर दिया। ऐसे में उन पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए। इसके बाद भी हालात नहीं संभले तो सुरक्षाबलों ने फायरिंग की। इसमें चार किसानों को गोली लगी। दो की मौत जिला अस्पताल में हुई। एक गंभीर रूप से घायल है। गोली चलने से करीब आठ किसान घायल बताए जा रहे हैं। पुलिस से छिटपुट झड़प जिले में अन्य जगहों पर भी हुई, जहां चार अन्य किसानों की मौत की खबर है।
थाने में आग लगाने की कोशिश
फायरिंग में किसानों की मौत के बाद भीड़ और हिंसक हो गई। उसने जिलेभर में आगजनी की। हिंसक भीड़ ने सबसे पहले पिपलिया मंडी थाने में आग लगाने की कोशिश की। यहां एक मकान को भी फूंक दिया गया। उसके बाद दो और चौकियों को आग के हवाले कर दिया। गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह ने कहा कि गोलियां पुलिस ने नहीं चलाई, बल्कि असामाजिक तत्वों और षड्यंत्रकारियों ने चलाई। वहीं, मंदसौर जिले की प्रभारी मंत्री अर्चना चिटनीस ने घटना को सियासी साजिश बताते हुए मादक पदार्थ तस्करों और कांग्रेस को इसके लिए जिम्मेदार बताया है।

राज्य सरकार से किसानों की प्रमुख मांगे

स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू की जाएं। देश की सभी कृषि उपज मंडियों में भारत सरकार द्वारा घोषित समर्थन मूल्य से नीचे फसलों की बिक्री न की जाए।आलू, प्याज सहित सभी प्रकार की फसलों का समर्थन मूल्य घोषित किया जाए। आलू, प्याज की कीमत 1500 रुपये प्रति क्वंटल हो।सभी किसानों के कृषि ऋण माफ किए जाएं। -भारत सरकार के भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 को यथावत रखा जाए। अधिनियम के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्र में गाइडलाइन का चार गुना और शहरी क्षेत्र में दो गुना मुआवजा दिया जाए।महंगाई को देखते हुए मध्यप्रदेश में दूध उत्पादक किसानों को 52 रुपये प्रति लीटर दूध का भाव तय हो और भाव तय करने का अधिकार किसानों को मिले।
दूध, दूध पाउडर और अन्य उत्पादों पर निर्यात सब्सिडी पुन: शुरू की जाए।फसलीय कृषि ऋण की सीमा 10 लाख रुपए की जाए। वसूली की समय-सीमा नवंबर और मई की जाए।भारत में डॉलर काबुली चना सिर्फ मध्यप्रदेश में ही पैदा होता है। उसका बीज प्रमाणित कर समर्थन मूल्य घोषित किया जाए। इससे भारत सरकार को विदेशी मुद्रा अर्जित होती है।खाद, बीज और कीटनाशकों की कीमतों को नियंत्रित किया जाए।एक जून से शुरू किसानों के असहयोग आंदोलन में गिरफ्तार सभी किसानों को बिना शर्त रिहा किया जाए।

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