अब होगा चप्‍पा… चप्‍पा… भाजपा

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पहली बार राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की कुर्सी पर भाजपा से जुड़े पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति पद पर रामनाथ कोविंद और एम वेंकैया नायडू होंगे। इतना ही नहीं उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री पर योगी आदित्‍य नाथ भी भाजपा से जुडे हैं।

भारतीय लोकतंत्र में विपक्ष पूरी तरह खत्‍म हो चुका है। देश के सभी सर्वोच्‍च पद पर भाजपा का परचम लहरा रहा है। उत्‍तर प्रदेश में योगी सरकार तो प्रधानमंत्री, राष्‍ट्रपति और उप राष्‍ट्रपति सब पर भाजपा का ही कब्‍जा हो गया है। यह पहली बार है कि चारो ओर भाजपा ही भाजपा है। 91 साल पहले 27 सितंबर 1925 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की नींव रखी गई थी। केशव बलराम हेडगेवार उसके संस्थापक थे। यह उस दौर की बात है, जब देश आजादी की लड़ाई लड़ रहा था। कांग्रेस का लोगों में काफी प्रभाव था और महात्मा गांधी की लोकप्रियता बढ़ रही थी। देश गुलामी की जंजीरों से बाहर निकलने के लिए आंदोलन कर रहा था। तब शायद ही किसी को यह अहसास रहा होगा कि एक दिन इसी संगठन से निकले लोग देश के दो सबसे बड़े पदों (राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति) की दौड़ में सबसे आगे होंगे। नरेंद्र मोदी 2014 में ही देश के प्रधानमंत्री बन चुके हैं। वह भी स्वयंसेवक रह चुके हैं। मौजूदा राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल खत्म होने की कगार पर है। देश में राष्ट्रपति चुनावों की वोटिंग हो चुकी है।
सर्वोच्च पद के लिए यूपीए ने मीरा कुमार जबकि एनडीए ने रामनाथ कोविंद को उम्मीदवार बनाया है। वहीं महात्मा गांधी के पोते गोपाल कृष्ण गांधी यूपीए के और एम.वेंकैया नायडू उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार हैं। अगर रामनाथ कोविंद और वेंकैया नायडू जीतते हैं  तो देश के इतिहास में पहली बार राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की कुर्सी पर आरएसएस-भाजपा के नेता होंगे।

भावी राष्‍ट्रपति हैं रामनाथ कोविंद

एक अक्टूबर 1945 को कानपुर देहात के पाराउख गांव में पैदा हुए थे। उनके पिता मैकूलाल वैद्य थे और गांव में किराने और कपड़े की दुकान भी चलाते थे। कोविंद की शुरुआती पढ़ाई-लिखाई स्थानीय स्कूल में हुई। कानपुर विश्वविद्यालय से उन्होंने वाणिज्य और विधि (लॉ) की पढ़ाई की है। कोविंद साल 1977 से 1979 तक केंद्र सरकार की तरफ से दिल्ली हाईकोर्ट में वकील थे। जब केंद्र में जनता पार्टी की मोरारजी देसाई सरकार बनी तो कोविंद पीएम के निजी सचिव बने। दिल्ली प्रवास के दौरान ही 1990 के दशक में उनकी मुलाकात उज्जैन के रहने वाले जन संघ के नेता हुकुम चंद से हुई थी जिनकी वजह से वो राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और बीजेपी से जुड़ गए। 1991 में बीजेपी ने उन्हें घाटमपुर लोक सभा से पार्टी का टिकट दिया लेकिन वो चुनाव हार गए।

संसदीय कार्यप्रणाली का लम्‍बा अनुभव है भावी उप राष्‍ट्रपति एम वेंकैया नायडू को

उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनने से पहले नरेंद्र मोदी सरकार में शहरी विकास राज्य मंत्री और सूचना एवं प्रसारण मंत्री थे। वेंकैया नायडू को संसदीय काम काज का बड़ा अनुभव रहा है। संसदीय कार्य मंत्री के रूप में भूम‍िका न‍िभाने के अलावा उन्‍होंने बतौर राज्‍यसभा सांसद चार बार न‍िर्वाच‍ित होने का सौभाग्‍य पाया है। अभी भी वह राजस्‍थान से ही राज्‍यसभा सांसद हैं। वह 1998, 2004,2010 और 2016 में राजस्‍थान से राज्‍यसभा सांसद बने। यह अनुभव उन्‍हें बतौर राज्‍यसभा सभापत‍ि (जो भूम‍िका पदेन रूप से उपराष्‍ट्रपति न‍िभाते हैं) काफी काम आएगा।
नरेंद्र मोदी: भारत के 14वें प्रधानमंत्री। 2001-2014 तक गुजरात के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। वह वाराणसी से सांसद हैं। बचपन में पिता के साथ वडनगर में चाय भी बेची थी। 1971 में आरएसएस के सदस्य बन गए। 1985 में संघ ने उन्हें बीजेपी में भेज दिया, जहां उन्होंने 2001 तक कई अहम पदों पर काम किया। वह पार्टी के महासचिव भी रह चुके हैं। केशुभाई पटेल की खराब छवि और स्वास्थ्य के कारण उन्हें 2001 में गुजरात का मुख्यमंत्री बनाया गया। 2002 में गुजरात दंगों के कारण उनकी काफी आलोचना हुई थी। 2014 में बीजेपी ने उन्हें पीएम पद का उम्मीदवार घोषित किया और उन्हीं की अगुआई में पहली बार बीजेपी ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी।

उत्‍तर प्रदेश में योगी आदित्‍यनाथ ने संभाली है सत्‍ता

विधानसभा चुनाव में भाजपा ने बस बार भारी बहुमत से सरकार बनाई है। भारी बहुमत वाली भाजपा को मुख्‍यमंत्री चुनने में समय जरूर लगा लेकिन जब योगी आदित्‍यनाथ के नाम का ऐलान हुआ तो लोगों ने राहत की सांस ली कि अब उत्‍तर प्रदेश को उत्‍तम प्रदेश बनने में देर नहीं लगेगी। ताबडतोड फैसले लेने और नौकरशाही पर लगाम कसने वाले योगीजी के सामने इन दिनों अपने ही चुनौती पेश कर रहे हैं लेकिन योगी जी के सधे कदम उनके मंसूबे कामयाब नहीं होने दे रहे हैं।

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